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मैनपुरी में आरटीओ कार्यालय से गायब हुआ वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस का रिकॉर्ड

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मैनपुरी। वाहनों के पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस के रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा एआरटीओ कार्यालय से गायब हो गया है। सालों पुराने अभिलेख गायब होने से समस्या आ रही है। विभागीय अधिकारी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लगभग चार सालों का रिकॉर्ड विभाग और जनता दोनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
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पूर्व में एआरटीओ कार्यालय में अभिलेखों को रखने के लिए जगह नहीं थी। ऐसे में रिकॉर्ड कभी कार्यालय की गैलरी तो कभी बरामदे में रखे जाते रहे। इससे बारिश के दौरान धीरे-धीरे बड़ी संख्या में अभिलेख नष्ट हो गए। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कार्यालय में भी काफी अभिलेख नष्ट हो गए। इसमें वाहनों के पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस के अभिलेख शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक के अधिकांश अभिलेख कार्यालय के पास नहीं हैं। ऐसे में जब भी इन वर्षों से संबंधित कोई मामला आता है तो उसका रिकॉर्ड ही नहीं मिलता है। इस समय के वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस अवैध मान लिए जाते हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन चाहकर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं।
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केसहिस्ट्री-एक:
किशनी के गांव गपकापुर निवासी विपिनराज यादव ने वर्ष 2002 में एक ट्रैक्टर पंजीकृत कराया था। एक कार्य के लिए दिसंबर में वह एआरटीओ कार्यालय से आरसी सत्यापित कराने आए थे। यहां पता चला कि उनके पंजीकरण का रिकॉर्ड ही अब विभाग के पास नहीं है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है।
केसहिस्ट्री-दो:
गांव भोजपुरा निवासी राकेश कुमार ने वर्ष 2001 में एक मोटरसाइकिल पंजीकृत कराई थी। एक सड़क दुर्घटना में वाहन को सीज कर दिया। बाद में एआरटीओ कार्यालय से डाटा मांगा गया, लेकिन विभाग के पास कोई डाटा उपलब्ध नहीं था। अब तक उनकी मोटरसाइकिल रिलीज नहीं की जा सकी।
वाहन कंपनी से मांगा जाएगा डाटा
अब लोगों की परेशानी को देखते हुए वाहन पंजीकरण से संबंधित अभिलेखों को दोबारा तैयार करने के लिए एक उपाय निकाला गया है। इसके तहत विभाग वाहन के चेसिस नंबर की जानकारी कंपनी को भेजेगा। कंपनी से ये जानकारी की जाएगी कि उन्होंने ये वाहन किसे बेचा है। इसी के आधार पर वाहन पंजीकरण के अभिलेख तैयार किए जाएंगे।
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नहीं कोई रास्ता
जिन ड्राइविंग लाइसेंस का डाटा एआरटीओ कार्यालय में नहीं है उनके लिए अब कोई उपाय नहीं है। दरअसल पूर्व में ड्राइविंग लाइसेंस ऑफलाइन ही बनते थे। अब एआरटीओ कार्यालय का डाटा ही गायब है तो उसे अवैध माना जाएगा। ऐसे लोगों को अब दोबारा लाइसेंस बनवाना होगा।
वर्जन
जो भी पुराना रिकॉर्ड नहीं है, उसके लिए कोई उपाय नहीं है। वाहन पंजीकरण के अभिलेख न मिलने के मामलों में वाहन कंपनियों से चेसिस नंबर के आधार पर वाहन स्वामी की जानकारी की जाएगी। इसके आधार पर फिर से पत्रावली तैयार करा दी जाएगी। प्रणव झा, एआरटीओ।
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