कासगंज। पुरातात्विक महत्व के जखेरा के प्राचीन टीले से मिट्टी का उत्खनन एनएचएआई की तरफ से सड़क निर्माण के लिए किया जा रहा था। इस टीले की मिट्टी के उत्खनन का मामला प्रकाश में आने पर अमर उजाला में खबर का प्रकाशन किया गया। डीएम मेधा रूपम ने इस खबर को संज्ञान लेते हुए फिलहाल खुदाई पर रोक लगा दी है और जांच के निर्देश एसडीएम सदर को दिए हैं। खुदाई पर रोक के बाद एनएचएआई के वाहन टीले से हट गए हैं।
एनएचएआई के द्वारा 530बी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। सडक़ निर्माण के लिए मिट्टी डालकर सडक़ का लेविल ऊंचा किया जा रहा है। इसके लिए जगह जगह से मिट्टी उत्खनन के लिए एनएचएआई कार्य कर रही है। जखेरा महेशपुर गांव में 4 दिन पहले से पुरातात्विक महत्व के टीले पर उत्खनन का कार्य किया जा रहा था। मिट्टी उत्खनन के दौरान प्राचीन सभ्यता से जुड़े हुए हुक्के आदि के अवशेष भी मिले। टीले की खुदाई होने की जानकारी जैसे ही लोगों को मिली तो मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा। डीएम के निर्देश पर उत्खनन का कार्य तत्काल रोक दिया गया। पुरातात्विक महत्व के यह टीले ग्रामीणों के खेतों में हैं। इन टीलों पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने काफी शोध किया है और टीले से निकली प्राचीन संस्कृति की वस्तुओं को संग्रहालय में रखा हुआ है।
- जखेरा एक ऐसा स्थान है जो अपने पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है। यह ताम्र युग से लौह युग तक और मौर्य काल तक जारी रहने वाला एक बहु सांस्कृतिक स्थल है। यह जिले में काली नदी के बाएं तट पर स्थित है। इसकी खुदाई 1974 से 1989 तक स्वर्गीय प्रोफेसर एम.डी.एन. साही द्वारा की गई थी।जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के उन्नत अध्ययन केंद्र में पुरातत्वविद् थे। इस उत्खनन से पुरावशेष मिले हैं, जो 5000 वर्ष पुराने हो सकते हैं। इसमें मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा की मूर्तियां, खिलौने, तांबे के औजार और हथियार, लोहे के औजार और उपकरण और शस्त्र आदि शामिल हैं। इसमें गेरू रंग के बर्तनों की संस्कृति, चित्रित ग्रे वेयर संस्कृति से लेकर उत्तरी काले पॉलिश वाले बर्तन तक की क्रमिक संस्कृतियां शामिल हैं।- एमके पुंढीर, पुराविद, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी।
- टीले पर की गई खुदाई को रुकवा दिया गया है। एसडीएम को जांच पड़ताल के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी जुटाई है।- मेधा रूपम, डीएम।