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Agra: मंदिर और बगीची का ऐसा विवाद...माहाैर और यादवों में भिड़ंत, थाने के बाहर जमकर हुई मारपीट

Sat, 23 Aug 2025 11:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

गोकुलेश्वर महादेव मंदिर और बगीची के विवाद को लेकर यादव और माहौर समाज के लोग आमने सामने आ गए। दोनों में जमकर मारपीट हुई। मामले में पुलिस ने अपनी ओर से केस दर्ज किया है। 
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agra police - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के गोकुलपुरा स्थित गोकुलेश्वर महादेव मंदिर और बगीची में शुक्रवार को एक परिवार के आयोजन में माहाैर और यादव समाज के लोग आमने-सामने आ गए। विवाद थाने पहुंचा। यहां थाने के बाहर मारपीट होने पर पुलिस ने दोनों पक्ष के 8 पुरुष और 4 महिलाओं का शांति भंग में चालान किया। बाद में सभी को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने अपनी ओर से केस दर्ज कराया है।
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एसीपी लोहामंडी मयंक तिवारी ने बताया कि गोकुलपुरा पुलिस चाैकी के पास कई वर्ष पुराना गोकुलेश्वर महादेव मंदिर है। इसके साथ ही बगीची बनी हुई है। इस पर कोली-माहाैर और यादव समाज के लोग अपना दावा जता रहे हैं। बृहस्पतिवार को यादव समाज के एक परिवार में गमी हो गई थी। इस पर महिलाएं बगीची में नहाने गई थीं। इसका माहाैर समाज ने विरोध शुरू कर दिया।
 

दोनों पक्षों के आमने-सामने आने पर हंगामा बढ़ गया। सूचना पर थाना लोहामंडी पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराया। शुक्रवार को एक बार फिर विवाद होने पर दोनों पक्ष के लोग महिलाओं के साथ थाना लोहामंडी पहुंचे। थाना परिसर में समाज के प्रबुद्ध लोग आपस में वार्ता कर रहे थे। वहीं थाने के बाहर खड़े लोग आपस में मारपीट करने लगे। लोगों को झगड़ता देखकर रास्ते में वाहन रुक गए। यह देखकर थाने से पुलिसकर्मी दाैड़ पड़े। उन्होंने 12 लोगों को पकड़ा। सभी पर कार्रवाई की गई।

 

पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का आरोप
कोली गर्जना महासंघ के संस्थापक सदस्य कैलाश माहाैर ने बताया कि मंदिर कोली समाज का है। समाज के लोग देखरेख और सेवा करते हैं। इस मंदिर के अध्यक्ष मनोज माहाैर हैं। इस पर यादव समाज के लोग अपना दावा जता रहे हैं। इसकी शिकायत करने थाने पर गए थे। मगर सुनवाई नहीं हुई। समाज की महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया। वह पुलिस आयुक्त से मिलेंगे। विरोध करने वालों में अभिषेक कोटिया, विकास माहाैर, भानु प्रताप माहाैर, रोहित माहाैर, अंकित माहाैर आदि शामिल रहे।

 
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वहीं जतिन यादव ने बताया कि बगीची सर्व समाज की है। इसके बावजूद समाज के एक परिवार के लोगों को मृत्यु उपरांत के कार्य करने से रोका गया। पुलिस ने भी सुनवाई नहीं की। उनके परिवार के लोगों को ही जेल भेज दिया गया। मारपीट में समाज के लोगों की कोई संलिप्तता नहीं थी।
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