फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केपटाउन में राशन पर मिलता है पानी, पीढ़ी पूछेगी पूर्वजों ने कुछ नहीं छोड़ाः पद्म भूषण डॉ. अनिल

Tue, 03 Mar 2020 12:05 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
जंतु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
यमुना मर रही है। पानी काले रंग से भी बदतर हो चुका है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 में अधिकतर शहर पानी के विकट संकट से जूझ रहे होंगे। आने वाले समय में हमें तर्पण के लिए भी पानी नहीं मिलेगा। भविष्य की पीढ़ी यह प्रश्न करेगी कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए पानी भी नहीं छोड़ा। प्रकृति हमें दण्डित कर रही है। कोरोना वाइरस उसी का परिणाम है।
विज्ञापन


आगरा कॉलेज में जन्तु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि प्रसिद्घ पर्यावरणविद्, पदमश्री व पदम भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने यह विचार रखे। सम्मेलन का विषय था 'पर्यावरण एवं जैव विविधता' इक्कीसवी सदीं में चुनौतियां व उपाय।

शुभारम्भ पर्यावरणविद एवं प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी ने किया। डॉ. अनिल प्रकाश ने कहा कि मनुष्य ने विकास के नाम पर विध्वंस रचा। आने वाले समय में दुनिया का 52 प्रतिशत आर्थिक विकास इसलिए संकट में पड़ जाएगा क्योंकि प्राकृतिक संसाधन निरंतर नष्ट हो रहे हैं। पृथ्वी पर आज तक जीव-जन्तुओं की सटीक गिनती नहीं हुई है, जो भी आंकड़े मिलते हैं वे सभी काल्पनिक हैं।
विज्ञापन

जंतु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
जल संकट पर उन्होंने कहा कि अब तक 1000 से अधिक नदियां विलुप्त हो चुकी हैं। दुनिया में एक सेकेंड में दस लाख पानी की बोतलें बिक जाती हैं। साउथ अफ्रीका के केपटाउन में 35 लीटर पानी राशन पर मिलता है। हम इतने निर्लज्ज हो गए हैं कि हमने आने वाली पीढ़ी के लिए हवा, पानी, मिट्टी व जंगल नहीं छोड़े हैं।

रासायनिक खाद्य के अंधाधुंध प्रयोग पर बोलते हुए कहा कि हम रासायनिक खाद्य के दुनिया में तीसरे सबसे बड़े उपभोक्ता व उत्पादक देश हैं। आज मिट्टी को फर्टिलाईजर का नशा लग गया है, उसके बिना वह उत्पादन नहीं करती।

वहीं, बीज वक्ता झांसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पर्यावरणविद प्रो. एसवीएस राना ने आगरा की टेनरीज से निकलने वाले क्रोमियम से चम्बल नदी में घड़ियाल के बच्चों की मौत की भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि डीयो व शेविंग फोम जैसे उत्पादों में बड़े स्तर पर क्लोरो फलौरो कार्बन जैसी गैस प्रयुक्त की जाती हैं, जो ओजोन परत के लिए खतरा पैदा करती हैं।

विशिष्ट अतिथि समाजसेवी डॉ. वीडी अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी व  धन्यवाद
ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कपूर ने दिया। संचालन एवं स्वागत भाषण आयोजन सचिव डॉ. विश्वकान्त गुप्त ने किया। संयोजिका डॉ. गीता माहेश्वरी ने सम्मेलन की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला।

डॉ. गौरांग मिश्रा व डॉ. अनुराग पालीवाल ने अतिथियों से सम्मेलन की शोध सारांश स्मरणिका का विमोचन कराया। प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. मनोज कुमार रावत ने की। सेंटजोंस कॉलेज के डॉ. गिरीश माहेश्वरी ने व्याख्यान दिया। सत्र के रिपोर्टियर शाहजहांपुर के डॉ. अरशद अली व डॉ. मीरा सिंह थे।

  
जीडीपी नहीं जीईपी की आवश्यकता 

पर्यावरणविद् ने कहा कि जीडीपी विलासिता के लिए होती है। उचित पर्यावरण के लिए सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) की आवश्यकता है, जिसमें हवा, पानी, मिट्टी व जंगल जैसे जीवन को जीने के लिए आवश्यक तत्व सम्मिलित हों। जीईपी को लेकर दिल्ली में पांच मार्च को बड़े स्तर पर बैठक भी होने जा रही है। वहीं, आर्थिक मंदी पर कहा कि भारत के साढ़े छह लाख गांवों में जब तक किसान खेतों में खड़ा है, तब कि इस देश को मंदी छू भी नहीं सकती है।  
विज्ञापन

आज तीन तकनीकी सत्र: 
मीडिया को-ऑर्डीनेटर डॉ. अमित अग्रवाल के अनुसार मंगलवार को सुबह 10 बजे से तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें जेएनयू दिल्ली के प्रो. पॉल राज पॉल, डॉ. बीआर आंबेडकर विवि के प्रो. अजय तनेजा तथा आरबीएस कॉलेज की डॉ. सीमा भदौरिया व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। समापन समारोह में जालमा-आईसीएमआर, आगरा के निदेशक डॉ. श्रीपद ए. पाटिल मुख्य अतिथि होंगे। साथ ही विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक व शिक्षाविदों को सम्मानित किया जायेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें