मैनपुरी। देवोत्थान एकादशी शुक्रवार को जिले भर में मनाई गई। घर-घर देव जगाए गए। व्रत रख लोगों ने घरों में पूजा अर्चना की। सिंघाड़ा और गन्ना की खरीद के लिए बाजारों में लोगों की भीड़ जमा रही।
भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की गई। महिलाओं ने आंगन में अल्पनाएं बनाईं और देव जगाकर सिंघाड़े और गन्ने का प्रसाद चढ़ाया। महिलाओं ने भजन-कीर्तन भी किए। देवोत्थान पर गन्ना और सिंघाड़े की खूब बिक्री हुई। भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयनकाल समाप्त कर देते हैं। वह प्रकृति को खुशनुमा बनाने के लिए अपनी भार्या श्री और लक्ष्मी को समस्त ब्रह्मांडमें एश्वर्य बिखेरने के लिए भेज देते हैं। शुभ कार्यों और विवाह की इसी दिन से शुरुआत हो जाती है। देवोत्थान एकादशी ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। वर्षा ऋतु की सर्वोत्तम फसल ईख और सिंघाड़े को भी इसी दिन से खाने योग्य माना जाता है।
परिणय सूत्र में बंधे 300 जोड़े
देवोत्थान पर हर गली-नुक्कड़ पर शादी के आयोजनों की धूम रही। जिले में करीब तीन सौ जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। बरात घर या धर्मशालाएं नहीं मिली तो लोगों ने गलियों और सड़कों पर ही पंडाल बनवा लिए। दिन में खरीदारों की भीड़ और रात में बरात चढ़ने से सड़कों और बाजारों में जाम के हालात बने रहे।
यात्रियों को उठानी पड़ी परेशानी
प्राइवेट मार्गों पर वाहनों की कमी के चलते यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। देवोत्थान पर शादियों के चलते अधिकांश बसें बरात के लिए बुक कर ली थीं। ऐसे में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में समस्या हुई। ट्रेनों पर भी ेआम दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक ही भीड़ नजर आई। किशनी, कुसमरा, हन्नूखेड़ा, मोटा, अलीगंज, बरनाहल, कुर्रा मार्गों पर यात्रियों को काफी देर तक वाहन का इंतजार करना पड़ा।
ब्यूटी पार्लर पर रही भीड़
देवोत्थान पर शादी-समारोह की अधिकता के चलते अधिकांश ब्यूटी पार्लर पर सुबह से ही सजने के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। कई जगह बुकिंग की गई।