फोटो 17 कासगंज में हरि की पौड़ी में पितरों को तर्पण करते लोग स्रोत संवाद
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सोरोंजी। पितृपक्ष में तीर्थनगरी में श्रद्धालु पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध पूजा और तर्पण करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। ब्रह्ममुहूर्त से पड़ोसी राज्य राजस्थान और मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। सूर्योदय के साथ ही श्राद्ध अनुष्ठान हरि की पौड़ी के अलग अलग घाटों पर तीर्थपुरोहितों के द्वारा कराए जा रहे हैं।इन दिनों पितृभक्ति से हरि की पौड़ी पर श्रद्धा और आस्था का नजारा देखने को मिल रहा है। हरि की पौड़ी के बालाजी घाट, वराह घाट, भागीरथी गंगा घाट, श्याम वराह घाट, लक्ष्मणजी घाट तर्पण और श्राद्ध पूजा करते श्रद्धालु नजर आते हैं। तीर्थनगरी के विद्वान आचार्य शशिधर द्विवेदी ने कहा कि माता-पिता को दुखी करने वाली संतान को पितृ दोष लगता है। पितृ दोष का प्रभाव तीन पीढ़ियों तक रहता है। गरुड़ पुराण में इसका विस्तृत वर्णन है। पितृ हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है। कोई न कोई उपकार उन्होंने हमारे जीवन के लिए किया है। अतः हमें भूल से भी उनकी आत्मा नहीं दुखानी चाहिए। ऐसा करने से तीन पीढ़ी हमारी संतान पितृ दोष से ग्रसित रहेगी। परिवार में कोई भी उन्नति और खुशहाली में बाधा रहती है