इच्छाओं के पीछे भागते-भागते हम अपने जीवन का सुख और समय दोनों बर्बाद कर देते हैं। सुबह आंख खुलने पर मोबाइल देखने की बजाय प्रभु का स्मरण करें और सोने से पहले दिनभर की चिंताओं को विराम देकर परमात्मा को धन्यवाद दें। जीवन में सुखी रहने के लिए जरूरी है कि हम यह समझें कि वास्तव में हमें कितनी चीजों की जरूरत है। यह संदेश प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता एवं कथा वाचिका देवी चित्रलेखा ने सोमवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में आयोजित जीवांजलि : विचारों से बदलाव तक कार्यक्रम में दिया।
अमर उजाला और कृष्णा कच्ची घानी सरसों तेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जीवांजलि के करीब एक घंटे के कार्यक्रम में देवी चित्रलेखा ने जीवन को सकारात्मक बनाने के कई सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि दिन की शुरुआत उस परमात्मा के स्मरण से होनी चाहिए, जिसने हमें जीवन दिया। कुछ समय प्रभु, गुरु और अच्छे विचारों के लिए निकालना चाहिए। इसी तरह रात में सोते समय चिंताओं को तिलांजलि देकर परमात्मा को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने हमें एक और दिन जीवन जीने का अवसर दिया।
तीन सूचियां बनाकर देखिए, वास्तव में जरूरत कितनी है
देवी चित्रलेखा ने श्रोताओं को गृहकार्य भी दिया। उन्होंने कहा कि घर जाकर तीन सूचियां बनाइए। पहली सूची में उन चीजों को लिखिए, जिनके बिना जीवन चलना मुश्किल है। जैसे रोटी, कपड़ा और अन्य मूलभूत जरूरतें। दूसरी सूची में उन चीजों को रखिए, जिनके बिना भी जीवन चल सकता है लेकिन उनके होने से सुविधाएं बढ़ जाती हैं। तीसरी सूची में उन चीजों को लिखिए, जिनकी वास्तव में हमें बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तीनों सूचियां सामने होंगी तो स्वयं समझ में आ जाएगा कि परमात्मा ने हमें जीवन जीने के लिए कितना कुछ पहले ही दे रखा है। हम किन चीजों की चिंता व्यर्थ में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत और इच्छा के बीच का अंतर समझना जरूरी है। अनावश्यक इच्छाएं हमारे जीवन का सुख और समय दोनों बर्बाद कर देते हैं।
अच्छी सोच किसी का जीवन बदल सकती है
देवी चित्रलेखा ने न्यूटन के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसा देंगे, वैसा ही लौटकर आने की बात श्रीमद्भागवत में भी बहुत पहले कही गई है। उन्होंने कहा कि किसी को पैसा देंगे तो वह खर्च हो जाएगा, कोई दूसरी वस्तु देंगे तो वह भी एक दिन समाप्त हो जाएगी लेकिन अगर किसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को एक अच्छी सोच दे दी जाए तो संभव है कि उसका पूरा जीवन बदल जाए। उन्होंने कहा कि इसलिए जीवन में दूसरों को अच्छी सोच देने का प्रयास करना चाहिए। जो लोग लगातार नकारात्मक बातें करते हैं या हमें परेशान करते हैं, उन्हें अपने जीवन में जरूरत से ज्यादा जगह नहीं देनी चाहिए।
कहते हैं फरारी में घूमती हूं, तो एक दिन कह दिया- जाकर देख लो
देवी चित्रलेखा ने अपने बारे में होने वाली टिप्पणियों और इंटरनेट पर होने वाली ट्रॉलिंग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से वह यह भी सुन रही हैं कि देवी चित्रलेखा फरारी (लग्जरी कार) में घूमती हैं। उन्होंने हंसते हुए एक प्रसंग सुनाया कि एक बार कथा में किसी ने उनसे पूछ ही लिया कि देवी चित्रलेखा, आपकी फरारी कैसी चल रही है, उन्होंने भी मजाक में जवाब दिया-हम तो इसमें बैठकर आए हैं, जाकर देख लो।
उन्होंने कहा कि दूसरों की नकारात्मक बातों को अपने जीवन पर इतना हावी नहीं होने देना चाहिए। जो लोग लगातार आलोचना या नकारात्मकता फैलाते हैं, उनसे दूरी बनाना बेहतर है। कोशिश होनी चाहिए कि हमारे दिमाग, आंखों और कानों में अनावश्यक नकारात्मकता का कचरा न पहुंचे। जीवन में वही चीजें भरिए, जो आपको भीतर से मजबूत और सकारात्मक बनाएं। एंग्जाइटी और डिप्रेशन पर भी उन्होंने कहा कि मन में आने वाले नकारात्मक विचारों को लगातार दोहराने के बजाय सकारात्मक सोच को जगह देनी चाहिए। मन को अनावश्यक बोझ से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में भक्ति संगीत की प्रस्तुति हुई। मेरी लगी श्याम संग प्रीत, दुनिया क्या जाने भजन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम के प्रायोजक
कार्यक्रम के प्रायोजक जीजी स्कूल ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल रहे। रेजोनेंस आगरा स्टडी सेंटर, नॉलेज पार्टनर, प्रेम स्कोडा ड्रिवन बाय, साइंटिफिक मेट्रोपोलिस पैथोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड हेल्थ पार्टनर और स्पोर्टेड बाय गणपति ग्रुप हैं।
एसोसिएट्स पार्टनर: शिवालिक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आगरा-मथुरा चैप्टर), गोविंद पंसारी, एथनिक और बाय आवी, श्री ज्वेलर्स, अतुल तिवारी और डीपीवी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, आगरा पब्लिक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, पाठक मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मैजिक फ्रेम्स, राजा बलवंत सिंह ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, सेंट पॉल्स चर्च कॉलेज यूनिट-2 तथा मेयर ट्रेड फेयर सहयोगी संस्थान हैं।
सोशल मीडिया से दूरी, धर्म से जुड़ाव जरूरी
नगला अजीता निवासी हर्षिता शर्मा ने कहा कि युवा सोशल मीडिया पर घंटों समय बिताते हैं। उन्हें अपने सनातन धर्म को समझने और धार्मिक विचारों के लिए भी थोड़ा समय जरूर निकालना चाहिए।
बेहतर मार्गदर्शन देते हैं ऐसे आयोजन
चर्च रोड निवासी डॉ. पीएन शर्मा ने बताया कि आजकल के युवा धर्म से दूर होकर सोशल मीडिया और नकारात्मक चीजों पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को सही राह दिखाते हैं।
मानसिकता में बदलाव से सुधरेगा भविष्य
सिकंदरा निवासी महिमा ने बताया कि वैचारिक संवाद वाले धार्मिक कार्यक्रम में वह पहली बार आई हैं। देवी चित्रलेखा के विचारों से सीख मिलती है कि जीवनशैली और सोच में बदलाव भविष्य सुधारता है।
मानसिक शांति का जरिया है प्रवचन
मऊ रोड निवासी नेम कुमार जैन ने कहा कि आज की भागदौड़, महंगाई और तनाव के बीच ऐसे आयोजन मन को शांति देते हैं। लोग थकान के कारण ईश्वर भक्ति से दूर हो रहे हैं।
सही और गलत की पहचान जरूरी
बोदला निवासी दृष्टि ने बताया कि अक्सर अनजाने में हुई गलतियों का अहसास नहीं होता। ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों से सही-गलत का बोध होता है, जिससे जीवन को बेहतर मार्गदर्शन और सही दिशा मिलती है।