आगरा। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ खत्म करने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 16 एकड़ जमीन पर घना जंगल विकसित करने का आदेश दिया है। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर एनजीटी ने कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर पर्यावरण संरक्षण के लिए गाइडलाइन तय की है।
एनजीटी चेयरमैन प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच ने आगरा नगर निगम की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि कुबेरपुर में पिछले कई दशकों से जमा 17.83 लाख टन पुराने कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण कर दिया गया है। इस प्रक्रिया से मुक्त हुई 47 एकड़ भूमि में से एक तिहाई यानी 16 एकड़ जमीन पर मियावाकी पद्धति से सघन वन और आधुनिक अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र विकसित किया जा रहा है।
पर्यावरणविद डॉक्टर शरद गुप्ता ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि टीटीजेड में स्थित कुबेरपुर लैंडफिल पर कचरे के पहाड़ खड़े। उनमें लगने वाली आग से वायु प्रदूषण फैल रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने समय-समय पर रिपोर्ट तलब की थी।
नगर आयुक्त ने एनजीटी में प्रस्तुत हलफनामे में कहा कि कूड़े के पहाड़ खत्म करके पुनः प्राप्त की गई 47 एकड़ भूमि का उपयोग अब पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जा रहा है। यहां 16 एकड़ में से 10 एकड़ में मियावाकी पद्धति से शहरी वन लगाने का काम शुरू किया गया है। इसके लिए जनवरी के फोटो भी लगाए गए हैं। अर्जुन, जामुन, इमली, नीम और बेल जैसे देसी पौधे लगाए हैं।
निगम ने एनजीटी से कहा है कि बायो-सीएनजी प्लांट, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट संयंत्र और प्रशासनिक भवन स्थापित किए गए हैं। दिसंबर तक वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगा दिया जाएगा।
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सीमेंट फैक्टरी जा रहा आरडीएफ
सुनवाई के दौरान डॉ. शरद गुप्ता ने कचरे के ढेर की तस्वीरें पेश कीं, जिस पर निगम ने स्पष्ट किया कि वे कूड़े के पहाड़ नहीं, बल्कि आरडीएफ (रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल) के स्टॉक हैं। इसका उपयोग निर्माणाधीन वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में ईंधन के रूप में होगा। वर्तमान में इसे चित्तौड़गढ़ स्थित सीमेंट फैक्टरी को भी भेजा जा रहा है। नगर निगम ने ट्रिब्यूनल को आश्वस्त किया कि आगरा में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले लगभग 982 टन कचरे के प्रसंस्करण के लिए अब पर्याप्त क्षमता विकसित कर ली गई है। डॉ. शरद गुप्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुल गुप्ता और आदित्य पैगोरिया ने पैरवी की।
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प्लास्टिक कचरे से पाइप बना रहा निगम
नगर निगम अब प्लास्टिक कचरे से पाइप और जूते के सांचे बनाकर रिसाइकिलिंग को बढ़ावा दे रहा है। वहीं 300 टन से बढ़ाकर अब 1500 टन कूड़े को रिसाइकिल करने की क्षमता है। फरवरी 2025 के बाद से साइट पर कोई भी नया कचरा बिना संसाधित किए जमा नहीं हो रहा है।
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भूमिगत जल भी नहीं होगा प्रदूषित
आगरा के लोगों को इनर रिंग रोड के पास भी एक बड़ा घना जंगल मिल जाएगा जो उस क्षेत्र के लिए फेफड़े का काम करेगा। शहर के पर्यावरण के लिए यह जरूरी था। अब लीचेट के कारण भूमिगत जल भी प्रदूषित होने का खतरा नहीं होगा। - डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद और याचिकाकर्ता
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नजीर बनेगा ये प्रोजेक्ट
- कुबेरपुर लैंडफिल साइट पूरे देश के लिए मिसाल बन रही है। यहां घना जंगल विकसित करने के साथ ही बाकी क्षेत्र में भी हरियाली और पार्क बनाए जा रहे हैं। एक ऐसा प्रोजेक्ट होगा जो बाकियों के लिए नजीर रहेगा। - अंकित खंडेलवाल, नगर आयुक्त