शहर में भी डेंगू ने दस्तक दे दी है। यहां एक मरीज में इसकी पुष्टि हुई है, जबकि 25 संदिग्ध मरीज हैं। इनका इलाज एसएन मेडिकल कालेज के डेंगू वार्ड में चल रहा है। इन सभी के रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। डेंगू के खतरे को देखते हुए मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग और जिला अस्पताल में स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं।
जिला अस्पताल के वार्ड में अभी एक भी मरीज नहीं है। डेंगू वार्ड प्रभारी डा. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि वायरल फीवर के मामले ज्यादा आ रहे हैं। हालत खराब होने पर उन्हें भर्ती किया जा रहा है। एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है। 25 मरीजों के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
प्राइवेट लैब में कम आ रहे मरीज
प्राइवेट लैब में डेंगू की आशंका वाले कम मामले ही आ रहे हैं। साइंटिफिक पैथोलॉजी लैब के डा. अशोक शर्मा बताते हैं कि वायरल फीवर होने पर जांच कराने के मामले तो बढ़े हैं। स्क्रीनिंग में संभावना होने पर स्वास्थ्य विभाग को भी रिपोर्ट की जाती है। अभी तक कोई पॉजिटिव नहीं मिला है।
मलेरिया के 34 मामले
डेंगू के मुकाबले मलेरिया का प्रकोप ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग ने 34 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि की है। खासतौर से गांवों के ज्यादा मरीज हैं। जिला मलेरिया अधिकारी आरके दीक्षित का कहना है कि 34 में से अधिकांश दुरुस्त हो चुके हैं। बताया कि एडीज एजिप्ट मच्छर के काटने से डेंगू होता है, ये दिन में काटता है। अगर बुखार आए तो पैरासीटामोल टैबलेट लेना चाहिए। साथ ही आराम करें। तेज बुखार, सिर में दर्द, आंखों में दर्द, लाल चकत्ते पड़ें तो तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
ध्यान रखें
- कूलर-आसपास पानी जमा न होने दें।
- फुल बाजू के कपड़े पहनें।
- रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- एकत्रित पानी में मिट्टी के तेल की बूंदे डालें।