एएमयू के 17 छात्र डेंगू की चपेट में
- फोटो : अमर उजाला
मामला दबाने में स्वास्थ्य विभाग पुलिस से भी आगे निकल गया। जिले में वायरल बुखार और डेंगू से 47 की मौत हो चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का बयान पुलिसिया अंदाज में आया है। विभाग की नजर में एक भी मौत डेंगू, मलेरिया और वायरल फीवर से नहीं हुई है। उनके यहां अभी तक की रिपोर्ट में मलेरिया के 58, डेंगू के 32 और चिकनगुनिया के दो मरीज दर्ज हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजिमी है। डेंगू-मलेरिया नहीं तो इन मौत की वजह क्या है। इसका जवाब भी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। सीएमओ डा. बीएस यादव का कहना है कि अभी तक विभाग मरीजों के सैंपल लेकर रिपोर्ट बना रहा है। इसके अनुसार डेंगू-मलेरिया से मौत नहीं हुई है। बीमार होने पर मरीज सरकारी अस्पताल में उपचार कराएं। वहीं प्राइवेट अस्पताल संचालक डेंगू का भय बताकर मरीजों से मनमाफिक फीस वसूल रहे हैं।
सीट 209, डाक्टर सिर्फ 129
स्वास्थ्य विभाग डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है। जिले में 18 सामुदायिक और 43 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। विभाग के अनुसार, सीएचसी पर पांच और पीएचसी पर दो चिकित्सकों की तैनाती रहे। इस तरह जिले में 209 सीट हैं और 129 चिकित्सक हैं। इससे चिकित्सकीय सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
बच्ची की मौत, दो में डेंगू के लक्षण
बाह/आगरा। बटेश्वर में बुखार से आठ साल की निधि पुत्री गुड्डी की मौत हो गयी। इसका इलाज आगरा के निजी हास्पिटल में चल रहा था। इस तरह मौत का आंकड़ा 47 पहुंच गया है। वहीं एसएन मेडिकल कालेज के डेंगू वार्ड में मंगलवार को चार मरीज भर्ती किए गए। पिछले मरीजों में से आई रिपोर्ट में एक को डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू वार्ड प्रभारी डा. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि सभी मरीजों की हालत ठीक है।
सीएमओ को निर्देशित किया गया है कि वह प्राइवेट अस्पताल के संचालकों के साथ बैठक कर मरीजों का उत्पीड़न न होने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके बावजूद यदि कोई शिकायत सही मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव दयाल, जिलाधिकारी
सामान्य बुखार को भी डेंगू मानते हुए लोगों में घबराहट की स्थिति बन रही है। बुखार एवं डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चिकित्सा विभाग को प्रभावी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं। लोग घबराएं नहीं बल्कि जांच कराएं।
नगेंद्र प्रताप, मुख्य विकास अधिकारी