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परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय बंद कर प्रदर्शन किया, टेबल पर रखी चूड़ियां

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आगरा। मुख्य परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया खोलने के लिए भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को भी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन किया। परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का गेट बंद करके उसके बाद करीब दो घंटे तक नारेबाजी की। परीक्षा नियंत्रक के कार्यकर्ताओं से मिले बिना पीछे के रास्ते से चले जाने पर संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यालय में जाकर टेबल पर चूड़ियां रखीं।
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संगठन कार्यकर्ताओं ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान 24 घंटे के अंदर फॉर्म भरने की प्रक्रिया खोले जाने की मांग की थी। ऐसा न होने पर बृहस्पतिवार को परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का गेट बंद करके उसके सामने बैठकर प्रदर्शन करने लगे। परीक्षा नियंत्रक कार्यकर्ताओं से मिलने नहीं आए। जब कार्यकर्ताओं को पता चला कि परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से जा चुके हैं तो कार्यकर्ता उनके कक्ष में जाकर टेबल पर चूड़ियां रख दीं। फॉर्म भरे जाने की प्रक्रिया खोलने की मांग की। विरोध प्रदर्शन में संगठन के जिलाध्यक्ष सतीश सिकरवार, प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव शर्मा, प्रदेश महासचिव अंकुश गौतम, ललित त्यागी, प्रदेश सचिव कुलदीप दीक्षित, आकाश चंद्रा, विकास, शैलेंद्र तोमर, नीरज प्रताप सिंह, पवन यादव, अनिल कुमार, प्रियांशु आदि मौजूद रहे।
मुख्य परीक्षा के लिए फॉर्म भरे जाने की आखिरी तारीख (बिना विलंब शुल्क के) 11 जुलाई निर्धारित की गई थी। छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुनर्परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए प्रक्रिया 500 रुपये विलंब शुल्क के साथ दो दिन के लिए फिर से खोल दी है। 16 जुलाई आखिरी तारीख निर्धारित की गई है। परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए बाकी छात्रों को विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फॉर्म भरने का अवसर नहीं दिया गया है। इन छात्रों को एक अवसर और दिए जाने के लिए एनएसयूआई की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
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परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव का कहना है कि फॉर्म भरने की तारीख बढ़ाने का प्रश्न नहीं है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि समय से छात्र-छात्राओं को प्रवेशपत्र उपलब्ध करा दिए जाएं। यदि फॉर्म भरे जाने की तारीख बढ़ाई जाती है तो निर्धारित तारीख (24 जुलाई) से परीक्षा कराना संभव नहीं होगा। 15 अगस्त से पहले परीक्षा कराना है। पुनर्परीक्षा में कम छात्र हैं, इनको समायोजित किया जा सकता है। सभी छात्रों के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया खोलने पर संख्या अधिक बढ़ जाएगी। फिर व्यवस्थाएं गड़बड़ाएंगी।
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