इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2022 में याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। कहा था कि जनहित याचिकाएं "मछली पकड़ने की जांच" की मांग के लिए नहीं हैं। अदालतें इतिहास को फिर से खोलने के लिए नहीं हैं।
इसी कड़ी में शुक्रवार को याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने इस साल जनवरी में एएसआई को एक अभ्यावेदन दिया था। लेकिन, अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसके बाद हाईकोर्ट ने एएसआई से उनके दावे पर गौर करने और उनके प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने को कहा।
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सुरजीत सिंह यादव एनजीओ हिंदू सेना के अध्यक्ष हैं। उन्होंने याचिका में दावा किया कि ताजमहल के निर्माण के बारे में जनता को "गलत ऐतिहासिक तथ्य" पढ़ाए और दिखाए जा रहे हैं। अधिकारियों को स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में संदर्भित इतिहास की पुस्तकों और पाठ्यपुस्तकों से शाहजहां द्वारा ताजमहल के निर्माण पर कथित और तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी हटाने का निर्देश देने की मांग की।
साथ ही स्मारक की उम्र का पता लगाने के लिए एएसआई को जांच करने का निर्देश देने की भी बात कही। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके शोध से पता चला है कि उस स्थान पर पहले से ही एक शानदार हवेली मौजूद थी। जहां मुगल सम्राट शाहजहां और उनकी पत्नी मुमताज महल के अवशेष एक गुंबद जैसी संरचना के नीचे रखे गए थे।