अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए बटेश्वर तीर्थ के घाटों पर बैकुंठ चौदस की बेला पर श्रद्धालुओं ने बड़ी तादाद में दीपदान किया। जलते दीपकों की रोशनी से यमुना की लहरें झिलमिला रही थी।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास की चौदस को बटेश्वर में दीपदान करने से साल भर में प्राण त्यागने वाले पूर्वजों के लिए बैकुंठ के द्वार खुल जाते हैं। इसी मान्यता के चलते मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु बटेश्वर तीर्थ पहुंचे। ब्रह्मलाल जी मंदिर में मत्था टेका और दीप जलाये। पूर्वजों के मोक्ष की कामना की। शिव मंदिर शृंखला के तट पर जलते दीपक यमुना नदी में बहाये। सांझ ढलने से देर रात तक यह सिलसिला चला। यमुना की लहरों पर अठखेलियां करते दीपकों की झिलमिलाहट हर किसी को आकर्षित कर रही थी। इस दौरान घाटों पर पुलिस और यमुना में मोटर वोट के साथ पीएसी के गोताखोर मुस्तैद रहे। मंदिर महंत जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि साल भर में स्वर्गवासी होने वाले पूर्वजों के मोक्ष के लिए बटेश्वर में दीपदान किया जाता है।