फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: तीन मंजिला शोरूम हुआ जमींदोज, 70 वर्ष पुराने भवनों में सताता है डर; दहशत में कारोबार कर रहे व्यापारी

Sun, 12 Apr 2026 04:18 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

शोरूम के मलबे से रास्ता बंद होने के चलते कोतवाली से दरेसी, सुभाष बाजार और बिजलीघर की ओर जाने वाले लोगों को अन्य रास्तों से जाना पड़ा। इस बंद के घेरे में आई करीब 12 से ज्यादा दुकानों पर ग्राहकों का आना जाना कम रहा। वह माल नहीं ला पा रहे हैं। 
विज्ञापन
किनारी बाजार में गिरा मलबा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

किनारी बाजार में गिरे तीन मंजिला शोरूम का मलबा शनिवार तक रास्ते से नहीं हट सका है। जो दुकान चपेट में आई थी उनके स्वामी भी मलबे में दबी अपनी दुकानों तक नहीं पहुंच सके हैं। रास्ता बंद होने से दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। इसके साथ आने जाने वाले लोगों को समस्या हो रही हैं।
विज्ञापन


सीता राम कालोनी, बल्केश्वर निवासी रिंकू बंसल का किनारी बाजार में तीन मंजिला शोरूम था। वह बृहस्पतिवार की रात भरभराकर गिर गया। मलबा सड़क पर आ गया। इससे तीन और दुकानें चपेट में आ गईं। इनमें एक दुकान पूरी तरह ध्वस्त हो गई। दो अन्य की इमारत पर नुकसान पहुंचा। मलबा न हटने से शनिवार को भी रास्ता बंद रहा। 

दोपहर करीब 2 बजे मलबा वाले स्थान से दोनों ओर रास्ते को बंद किया हुआ था। कोतवाली से दरेसी, सुभाष बाजार और बिजलीघर की ओर जाने वाले लोगों को अन्य रास्तों से जाना पड़ा। इस बंद के घेरे में आई करीब 12 से ज्यादा दुकानों पर ग्राहकों का आना जाना कम रहा। वह माल नहीं ला पा रहे हैं। उन्हें रास्ता बंद होने से रोज नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन


रोजगार गंवाने के डर से खतरे में कर रहे व्यवसाय
तीन मंजिला शोरूम के ढहने की घटना के बाद शनिवार को किनारी बाजार सामान्य रूप से खुला। दुकानदार और व्यवसायी अपने कार्यों में लगे दिखे, लेकिन उनके बीच पुराने जर्जर भवनों को दिए जा रहे नगर निगम से नोटिसों की सुगबुगाहट थी। वह मान रहे थे 70 साल से अधिक पुराने भवन कब धोखा दे दें पता नहीं लेकिन रोजगार के लिए खतरों के बीच व्यवसाय करना भी मजबूरी है। इस पर वह कुछ स्पष्ट तो नहीं बोले लेकिन इन दुकानों पर कार्य करने वाले कर्मचारी और मजदूर कहना था कि यहां काम करना जोखिम भरा है। दोपहर करीब 1:15 बजे का समय था। बाजार में दुकानों पर तीन मंजिला शोरूम के ढहने की चर्चा हो रही थी। इसके साथ ही लोग किनारी बाजार में पहले हुई दुर्घटनाओं की बात कर रहे थे। 70 साल से अधिक पुराने भवनों में चल रहे शोरूम, चांदी गलाई कारखाने और विभिन्न प्रकार के व्यवसायों को लेकर चिंता भी जता रहे थे। लेकिन अमर उजाला की टीम से नाम बताने में परहेज किया। वहीं परचून और चाय की दुकानों पर एकत्रित हुए कुछ मजदूर मिले उन्होंने खुलकर बात की।

 
विज्ञापन

दो दिन से कारोबार है प्रभावित
दो दिन बीत गए अभी तक मलबा नहीं उठ सका है। हालांकि जिनकी दुकान ढही है वह अधिक मजदूर लगाकर जल्दी उठाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मजदूर कम और व्यस्त रास्ता होने के कारण काम जल्दी नहीं हो पा रहा है। दो दिन से कारोबार प्रभावित है। दुकान में सामान भरना था लेकिन रास्ता न होने के कारण आ नहीं ला पा रहे हैं। -हिमांशु , पूजा बूट हाउस

मलबा हटने से नुकसान का पता चले
मलबा हटने का इंतजार कर रहे है। इस दुर्घटना में दुकान दबने के बाद काफी नुकसान हुआ है। रोज की आमदनी बंद हो गई। अब मलबा हटे तो पता चले कितना नुकसान हुआ है। रोजाना इंतजार करते रहते है कि मलबा हटे तो दुकान तक पहुंचा जाए। -मनोज गर्ग, मलबे में दबी आगरा जरी दुकान के मालिक

रास्ता बंद होने से दुकानदारों को नुकसान
रास्ता बंद होने से नुकसान तो सभी दुकानदारों को हो रहा है। क्योंकि ग्राहक तो रास्ते से ही आएंगे। शोरूम मालिक अपना प्रयास कर रहे हैं, प्रशासन को भी इसमें सहायता करनी चाहिए क्याेंकि रास्ता बहुत से लोगों का है। इसके बंद रहने से बाजार को नुकसान हो रहा है। -अनुराग अरौरा, अध्यक्ष, कसेरट बाजार कमेटी

यहां काम करना जोखिम भरा है
इतना बड़ा बाजार है, रोज हजारों लोगों का आना जाना रहता है। कई हादसे हो गए लेकिन बाजार में कोई परिवर्तन नहीं आया है। हालांकि इस तरह मकान ढहने का पहला मामला है। बाजार में हर चौथा मकान 60 से 70 साल पुराना है। उन्हीं में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। संकरी गलियों में चांदी गलाई कारखाने चल रहे हैं। यहां काम करना जोखिम भरा है। अति जर्जर मकानों को फिर से बनाने की जरूरत है। -सुरेंद्र शर्मा, सराफा कर्मचारी

जर्जर मकानों का सर्वे हो
जहां शोरूम गिरा है यह रास्ता सबसे व्यस्ततम है। यहां से भीड़ देर रात तक निकलती रहती है। ये इमारत तो ज्यादा पुरानी भी नहीं थी लेकिन काफी मकान सड़क किनारे पुराने और जर्जर हालत में हैं। इनमें से कोई गिर गया तो बड़ी जनहानि संभव है। प्रशासन मकानों का सर्वे कराकर अति जर्जर मकानों का फिर से निर्माण करवाए।   - आदित्य सिंह, जूता दुकान कर्मचारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें