मैनपुरी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को ही धर्म मानकर जीवन पर्यंत उनका पालन करने की शपथ लेकर चल रहे लोग आज भी मौजूद हैं। वे स्वयं भी उस रास्ते पर चल रहे हैं, लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। गांधीवादी विचारधारा पर चलने वाले ऐसे लोगों के लिए गांधी कता आदर्श ही सबकुछ है।
समाजसेवा के लिए त्याग जरूरी है
कस्बा बेवर निवासी 82 वर्षीय इंद्रपाल यादव के जीवन के जीवन का उद्देश्य समाजसेवा है। ये उद्देश्य उन्हें महात्मा गांधी से मिला था। बचपन में देश और समाज के लिए महात्मा गांधी द्वारा किए गए त्याग से वह इतने प्रभावित हुए कि जवानी में दो साल फौज की नौकरी करने के बाद नौकरी छोड़कर समाज सेवा करने लगे। वे कहते हैं कि समाज का हर व्यक्ति सुख का हकदार है। सबसे निचले पायदान के व्यक्ति की बेहतरी तक प्रयास करके ही महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनाया जा सकता है।
स्वच्छता को बनाया जीवन
महात्मा गांधी ने स्वच्छ भारत का सपना देखा था। उनके इस सपने को पुरानी मैनपुरी की गलियों में रहने वाले 90 वर्षीय गांधीवादी श्रीकृष्ण चतुर्वेदी लंबे समय साकार करने की कोशिशों में जुटे हैं। बैंक से सेवानिवृत्त श्रीकृष्ण चतुर्वेदी के लिए स्वच्छता से बढ़कर दूसरी कोई सेवा नहीं है। उन्हें जहां भी गंदगी नजर आती है वहीं साफ-सफाई में जुट जाते। इतना ही नहीं अब उनका शरीर शिथिल हो चला है, लेकिन आज भी वे लोगों में स्वच्छता की अलख जगा रहे हैं।