विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक एसआईटी की सूची 28 दिसंबर 2019 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक करके समाचारपत्रों में विज्ञापन दिया गया था। हाईकोर्ट ने भी माना कि अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर दे दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर फर्जी अभ्यर्थियों पर निर्णय लिया गया है। जिन 813 अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन दिए हैं, उनको स्कैन कराकर एसआईटी को भेजा जाएगा।
795 अभ्यर्थियों ने महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑनलाइन प्रत्यावेदन 12 जनवरी तक और ऑफलाइन छह फरवरी तक लिए गए। 813 में से 795 अभ्यर्थियों ने मांगी गई महत्वपूर्ण सूचनाएं विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराई हैं। महज 18 अभ्यर्थियों ने महत्वपूर्ण सूचनाएं दी हैं।
21 दिन के अंदर प्रत्यावेदन देने वालों पर निर्णय
कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा कि प्रत्यावेदन देने वाले अभ्यर्थियों की रिपोर्ट एसआईटी को देखने के लिए भेजी जा रही है। उसने ही मामले की जांच की है। 21 दिन के अंदर प्रत्यावेदन देने वाले अभ्यर्थियों पर भी निर्णय ले लिया जाएगा। टेंपर्ड और एक रोल नंबर पर एक अधिक अभ्यर्थियों के मामले में भी जल्द निर्णय लिया जाएगा। इनको डाक से नोटिस भेजा जाएगा। एक-एक अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
4766 अभ्यर्थी एसआईटी की संशोधित सूची में थे।
3637 को फर्जी अभ्यर्थियों की सूची में रखा गया।
1084 अभ्यर्थी टेंपर्ड सूची में शामिल हैं।
45 को एक रोल नंबर पर एक से अधिक अभ्यर्थियों की सूची में रखा गया है।
813 अभ्यर्थियों (फर्जी श्रेणी के) ने प्रत्यावेदन दिए हैं।
2824 ने प्रत्यावेदन नहीं दिया, फर्जी माना गया।
देश-दुनिया और अपने क्षेत्र की हर खबर सबसे पहले पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप हमें फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फॉलो भी कर सकते हैं।