कासगंज। जिले में सहकारी समितियों पर डीएपी न होने से ताले लटके हैं। जिसे देखकर किसान मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। डीएपी न मिलने से किसान काफी परेशान है, क्योंकि यह सीजन आलू और सरसों की फसल के बुवाई का है, दोनों की खेती डीएपी के अभाव में पिछड़ रही। किसान को फसल की बुवाई पिछड़ने की चिंता सता रही है।
जिले में अति बारिश से किसान की मक्का, बाजरा, धान, दलहन, तिलहन की फसल प्रभावित हो गई। किसान ने समय से पहले ही फसल को काटना शुरू कर दिया। ताकि खेत खाली हो जाने पर इसमें रबी की फसल की बुवाई कर सकेंगे। इस समय रबी की फसल में आलू तथा सरसोंं की फसल की बुवाई का सीजन चल रहा है। किसान फसल बोने के लिए खाद की खरीद के लिए सहकारी समितियों पर दस्तक देने लगा है, लेकिन किसान को खाद के संकट का समाना करना पड़ रहा है। किसान को फसल की बुवाई के समय डीएपी की आवश्यकता रहती है, लेकिन जिले में संचालित 34 सहकारी समितियों पर इस समय डीएपी उपलब्ध नहीं है। समिति के संचालक भी खाद न होने से समितियों को नहीं खोल रहे। ताले लटके देख किसान मायूस होकर वापस लौट जाते हैं।
सितंबर माह में समितियों को 1200 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई थी। बफर से 1100 मीट्रिकटन डीएपी का उठान र दिया गया है। 15 समितियों पर डीएपी पहुंच चुकी है। शीघ्र ही अन्य समितियों पर खाद की उपलब्धता हो जाएगी। बीके मिश्रा, एआर को-आपरेटिव