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Agra News: कदम-कदम पर खतरा, फाॅग लाइट नहीं...फेंसिंग भी टूटी

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यमुना एक्सप्रेसवे के खंडोली कट पर गलत दिशा से निकलते वाहन
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आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर कदम-कदम पर जान का खतरा है। दोनों तरफ की लेन के किनारे पर निराश्रित पशुओं को आने से रोकने के लिए लगाए गए कंटीले तार टूटे पड़े हैं। रिफ्लेक्टर कहीं लगा हैं और कहीं नहीं। चालक-परिचालकों के रेस्ट रूम पर रेस्तरां के कर्मचारियों का कब्जा है। लेन की सफेद पट्टी मिट गई हैं। फाॅग लाइट का पता नहीं है। कैमरों से निगरानी की सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में कोहरे में वाहनों को रास्ते का पता चलना तो दूर आगे बढ़ने पर हादसे की आशंका बनी रहती है।
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दिल्ली से आगरा के सफर को आसान करने के लिए वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे की शुरुआत हुई थी। 165.5 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का है। दोनों तरफ तीन-तीन लेन में वाहन गुजरते हैं। मथुरा में मंगलवार तड़के कोहरे के दौरान हादसा हुआ। दो कारों की टक्कर के बाद चालकों में बहस हुई। तभी पीछे से स्लीपर बस सहित कई वाहन एक-दूसरे से टकराते गए। हादसे में 14 लोगों की जान चली गई।
इस घटना ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और संरक्षा के इंतजाम का बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की। एक्सप्रेसवे पर खंदाैली इंटरचेंज से वाहन चढ़ते हैं। मगर, यहां पर संकेतक के नाम पर कुछ नहीं है। बोर्ड भी 50 मीटर आगे लगा हुआ है। यमुना एक्सप्रेसवे पर कुबेरपुर से आने वाले वाहन इस कट से उतरकर खंदाैली की तरफ गलत दिशा से निकलते हैं। यहां पर कर्मचारियों की तैनाती रहती है। मगर वो ध्यान नहीं देते हैं। इससे हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है।
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- चोरी हो गए तार तो कहीं टूटे
इससे आगे खंदाैली इंटरचेंज से जैसे ही चलेंगे तो एक्सप्रेसवे की दोनों तरफ कंटीले तार की बाड़ भी टूटी हुई है। कई बार कम ऊंचाई होने पर गाय के आने का खतरा बना रहता है। इसी को रोकने के लिए ही यह तार लगाए गए थे। मगर यह तार कहीं चोरी हो गए तो कहीं टूटे पड़े हैं। इसके बाद इनको कभी बदला भी नहीं गया है।

- मिट गई सफेद पट्टी
कोहरे में सफेद पट्टी के सहारे चलकर रास्ता पार किया जा सकता है। इससे हादसे की आशंका कम हो जाती है। एक्सप्रेसवे पर कई जगह पर यह पट्टी मिल गई है। इससे एक लेन से दूसरी पर जाने का पता नहीं चल पाता है। हालांकि इसे ठीक करने का काम भी चल रहा है। कोहरे में सफेद पट्टी न होने से हादसे हो सकते हैं।

- रेस्ट रूम पर कर्मचारियों का कब्जा
खंदाैली टोल प्लाजा के पास रेस्ट रूम बना हुआ है। योजना थी कि वाहन चालक और परिचालक कुछ देर के लिए आराम कर सकें। उनके लिए कमरे से लेकर शाैचालय की सुविधा दी गई। मगर इसका प्रयोग शायद ही कभी चालक और परिचालकों ने किया होगा। वर्तमान में इस रेस्ट रूम में एक्सप्रेसवे के कैंटीन के कर्मचारी रहते हैं। इसके अलावा कोई नहीं आता है।

- फाॅग लाइट नहीं होने से अंधेरा
एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह गति सीमा के बोर्ड लगे हैं। कट के बारे में जानकारी दी गई है। मगर कोहरे में कट पर फाॅग लाइट का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पूरे एक्सप्रेसवे पर अंधेरा रहता है। ऐसे में जहां पर लोग मुड़ना चाहते हैं, वहां भी संकेतक और लाइट न होने से खतरा बना हुआ है।

हर दिन निकलते हैं 20 हजार वाहन
यमुना एक्सप्रेसवे से हर दिन 18 से 20 हजार तक वाहन निकलते हैं। लाखों का टोल वसूल किया जाता है। हादसों के बाद कुछ दिन संरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। मगर पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से हादसे होते हैं।

झरना नाला में बस गिरने से मरे थे 29 लोग
जुलाई 2019 में यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा हुआ था। सवारियों से भरी जनरथ बस गांव मुड़ी, खंदाैली के पास झरना नाले में गिर गई थी। इस घटना में 29 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद इस हादसा स्थल पर इंतजाम किए गए। डिवाइडर पर बैरियर लगाए दिए गए। संकेतक भी लगाए गए।
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