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ठगी का नया तरीका: लोन डिफाल्टरों को शिकार बना रहे साइबर अपराधी, झांसे में लेकर ऐसे करते हैं वसूली

Mon, 08 Jun 2026 11:28 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

साइबर अपराधी अक्सर एक से दो हजार रुपये की छोटी रकम लेते हैं। इस कारण कई पीड़ित पुलिस में शिकायत नहीं करते हैं। ठग फर्जी लोगों और मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करते हैं। वे पैसे मिलने के बाद संपर्क तोड़ देते हैं।
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साइबर अपराधी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साइबर अपराधी ऑनलाइन फाइनेंस एप से ब्लैकलिस्ट हुए लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोन दिलाने या आईडी खुलवाने का वादा करते हैं। इसके बदले एक से दो हजार रुपये तक की फीस वसूलते हैं, जिससे कई लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।
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अधिकांश मामलों में रकम कम होने के कारण पीड़ित पुलिस से शिकायत भी नहीं करते हैं। डीसीपी साइबर क्राइम ने लोगों को अनजान लिंक और विज्ञापनों से संपर्क न करने की सलाह दी है। लायर्स कॉलोनी निवासी मोनू कुशवाह को नौकरी छूटने पर ऑनलाइन एप से लोन नहीं मिला। एप ने उन्हें दो माह के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

सोशल मीडिया पर उन्हें एक विज्ञापन दिखा जिसमें पुरानी लोन एप का लोगो था। विज्ञापन में पुराना लोन बंद कराने और आईडी खुलवाने का ऑफर दिया गया था। लिंक पर क्लिक करने पर एक नंबर मिला। कॉल करने पर नए नंबर से कॉल आई जिसने आईडी खुलवाने के लिए दो हजार रुपये मांगे। क्यूआर कोड पर रुपये भेजने के बाद भी उनकी आईडी ब्लैकलिस्ट ही रही। मोनू ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।
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तोरा निवासी अनूप कुमार भी एक एप से लोन लेकर ब्लैकलिस्ट हो गए थे। उन्हें फेसबुक पर एक विज्ञापन दिखा जो ठगी का प्रयास था। अनूप ने एप के नाम में गलती पकड़ी और रुपये भेजने से इन्कार कर दिया। उन्होंने एप के हेल्प सेक्शन में जांच की तो ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। इस सतर्कता से वह ठगी से बच गए।

 
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ठगी का नया तरीका
साइबर ठग कंपनी के नाम पर फीस मांगते हैं। वे अक्सर एक से दो हजार रुपये की छोटी रकम लेते हैं। इस कारण कई पीड़ित पुलिस में शिकायत नहीं करते हैं। ठग फर्जी लोगो और मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करते हैं। वे पैसे मिलने के बाद संपर्क तोड़ देते हैं।

डाटा चोरी कर बनाते हैं शिकार
साइबर एक्सपर्ट अभिषेक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधी डार्क वेब पर लोगों का डाटा खरीदते हैं। इससे उन्हें लोगों की ऑनलाइन खरीदारी, लोन और हर डिजिटल लेनदेन का पता चल जाता है। इसके बाद वह ऐसे लोगों को चिह्नित कर ठगने की कोशिश करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
-सोशल मीडिया या मैसेज में आए लोन ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें।
-किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
-केवल अधिकृत बैंक/कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एप से ही लोन लें।
-प्रोसेसिंग फीस या फाइल चार्ज पहले मांगने वालों से सावधान रहें।
-कॉल करने वाले की पहचान और कंपनी का सत्यापन जरूर करें।
-आधार, पैन, ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
-एप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग और रिव्यू जांच लें।
-छोटी रकम की ठगी होने पर भी पुलिस या साइबर सेल में शिकायत जरूर करें।
-संदिग्ध नंबर और लिंक तुरंत ब्लॉक करें।
-जागरूक रहें और दूसरों को भी सतर्क करें।



 
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