केस-1
बीते साल जून माह में कासगंज जिले में तैनात तत्कालीन एएसपी आईपीएस आदित्य वर्मा साइबर अपराधियों के जाल में फंसे। हालांकि उन्होंने साइबर अपराध के खुलासे के लिए स्वयं ब्लैकमेल होने की योजना बनाई। पहले उन्हें साइबर अपराध से जुड़ी महिला ने अश्लील हरकत के लिए प्रेरित किया। बाद में वॉयस कॉल के माध्यम से तीस हजार रुपये मांगे। इस घटना में एएसपी ने कासगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया।
केस-2
शहर के मोहल्ला जय जयराम निवासी सेना से रिटायर्ड कप्तान रविंद्र कुमार सितंबर माह में साइबर अपराध का शिकार हुए। उनसे साइबर अपराधियों ने ओटीपी मांगा और उनके खाते से 90 हजार रुपये गायब कर लिए। इस घटना का मुकदमा कासगंज कोतवाली में रिटायर्ड कप्तान ने एसपी के आदेश पर दर्ज कराया।
कासगंज से बंगाल तक फैला है नेटवर्क
पिछले साल सात अप्रैल को ढोलना पुलिस ने साइबर अपराध का खुलासा किया था। इसमें पश्चिम बंगाल के सरफराज मियां, मयूद्दीन शेख, अभिमन्यू सहित जिले के सात सक्रिय सदस्य गिरफ्तार किए गए। उस समय स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराधियों का जाल कासगंज से पश्चिम बंगाल तक फैला है।
आंकड़े की नजर से
- 18 साइबर अपराध के जिले में दर्ज हैं मामले।
- 11 मामले निस्तारण कर धनराशि वापस दिलाने का पुलिस का दावा।
इस तरह करें बचाव
- किसी भी व्यक्ति को बैंक संबंधी जानकारी न दें।
- एटीएम कार्ड का नंबर न बताएं, खाते का नंबर न दें।
- किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा फोन पर भेजे गए लिंक आदि को न खोलें।
- बैंक अधिकारी बनकर कोई फोन करे तो उसे बैंक संबंधी जानकारी न दें।
एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि साइबर अपराध के पूर्व में खुलासे हो चुके हैं। और खुलासों के लिए साइबर सेल की टीम लगी हुई है। लोग किसी के प्रलोभन में न आएं। प्रलोभन देने वाला व्यक्ति साइबर ठग हो सकता है। सतर्कता ही बचाव है। दर्ज हुए सभी मामलों का खुलासा किया जाएगा।