पुलिस का तंत्र हाईटेक है फिर भी ठग लगातार मालामाल हो रहे हैं, वहीं अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने वाली जनता बेहाल है। पिछले 9 महीने 10 दिन में 19 करोड़ से अधिक रुपये साइबर अपराधी लूट चुके हैं। इसके इतर पुलिस अब तक मात्र 14 फीसदी रकम ही पीड़ितों को दिला सकी है। बाकी 86 फीसदी रकम या तो खातों से निकल गई या फिर खातों में पड़ी होने के बावजूद पीड़ितों को नहीं मिल सकी है।
कानपुर नगर निगम में सेवानिवृत्त लेखाकार विनोद कुमार श्रीवास्तव को डिजिटल अरेस्ट किया गया। एटीएस का अधिकारी बनकर उनकी गाढ़ी कमाई के 72.74 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। उन्हें रकम वापसी का इंतजार है। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी डिजिटल अरेस्ट, निवेश में मुनाफे का लालच देकर और ग्रीन गैस का बिल अपडेट करने के नाम पर साइबर अपराधी लोगों के खाते से रकम उड़ा चुके हैं।
लोग कैसे-क्यों बन जाते हैं शिकार?
पुलिस के मुताबिक, वर्तमान में ऑनलाइन खरीदारी का दाैर है। अधिकतर लोग अपने मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, घर का पता अलग-अलग एप पर शेयर करते हैं। साइबर अपराधी इसी का फायदा उठाते हैं। विभिन्न मॉल, कंपनियों, मोबाइल व सिम की दुकानों, साइबर कैफे आदि से जुड़े डाटा कभी चुराकर तो कभी मिलीभगत से हासिल कर लेते हैं। कई बार अलग-अलग इलाकों में बैठे साइबर अपराधी टेली कॉलिंग से लोगों को भी शिकार बनाते हैं। कभी बीमा-निवेश के नाम पर ठगते हैं तो कभी गिरफ्तारी का डर दिखाकर। इतना ही नहीं रिवार्ड पॉइंट, नौकरी का झांसा, घर बैठे कमाने का प्रलोभन भी इनका हथियार है। पेंशन दिलाने, बिजली बिल ठीक कराने, केवाईसी कराने, ग्रीन गैस का बिल अपडेट कराने की कहकर भी ठग रहे हैं।
हाल में आए मामले
- सीआईडी इंस्पेक्टर के खाते से 4 लाख रुपये निकल गए। उन्हें जानकारी रुपये निकलने के बाद हो सकी।
- सिकंदरा निवासी अमित कुमार को निवेश करने का झांसा देकर 5.40 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
- न्यू जनता कॉलोनी निवासी संतोष कुमार से टेलीग्राम चैनल से जोड़कर 7 लाख रुपये निवेश के नाम पर ठग लिए।
- सरवन नगर, सेवला जाट निवासी महेश चंद्र के खाते में सेंध लगाकर पांच लाख रुपये निकाल लिए गए।
- कमला नगर निवासी मुकेश कुमार वर्मा के मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड करा 596900 रुपये निकाले।
- ग्रीन गैस सब्सिडी के नाम पर 12 रुपए भेजने का झांसा देकर जाल में फंसाकर बुजुर्ग के खाते में की गई एफडी तुड़वाकर 22.88 लाख निकाले।
झारखंड-महाराष्ट्र से काॅल, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश के खाते
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी दो तरीके से ठग रहे हैं। एक तो लालच देते हैं, दूसरा डर दिखाते हैं। दोनों ही मामलों में जागरूकता के अभाव में वारदात होती है। पुलिस के पास साइबर धोखाधड़ी के 100 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने जिन नंबरों से काॅल किए गए, जिन खातों में रकम गई, उनकी जांच की। सामने आया कि काॅल झारखंड और महाराष्ट्र के पिछड़े इलाकों से किए गए थे जबकि खाते दिल्ली, मध्य प्रदेश और यूपी के बैंकों के थे। डिजिटल अरेस्ट के मामले में लोग काफी दिन बाद शिकायत दर्ज कराते हैं। तब तक रकम आरोपी निकाल लेते हैं। अन्य ठगी के मामले में रकम निकलने से पहले शिकायत पर होल्ड कराकर रकम वापसी करा दी जाती है।
निजी जानकारी अनजान को न दें
- किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते, आधार नंबर, पैन कार्ड की जानकारी न दें।
- पुलिस, सीबीआई, एटीएस के नाम पर काॅल करने वालों से बात नहीं करनी चाहिए।
- अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
- ग्रीन गैस कंपनी का बिल अपडेट और सब्सिडी के नाम पर काॅल करने वालों से सावधान रहें।
- निवेश के नाम पर टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ने वाले ठगी करते हैं।
- साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करें।
पार्सल आया है...क्लिक कर देना
पुलिस के पास दो ऐसे मामले भी पहुंचे हैं, जिनसे इन दिनों साइबर ठगी की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों के पास काॅल किया गया। यह कहा कि उनका पार्सल आया है। मगर मोबाइल नंबर गड़बड़ हो गया। इसलिए काॅल नहीं लग रहा है। आपको एक मैसेज भेजा जा रहा है। इस पर क्लिक कर देना। मैसेज में एक कोड होता है। इस पर क्लिक करते ही कॉल फारवर्ड हो जाती है। मोबाइल के साथ व्हाट्सएप भी हैक हो जाती है। फिर आरोपी कान्टैक्ट लिस्ट से लोगों के नंबर लेकर मदद के नाम पर मैसेज भेजकर ठगी करते हैं।