पहले सेशन में जुड़े डेढ़ लाख लोग
कैंपन में डीजीपी के अलावा एडीजी एलओ प्रशांत कुमार, एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण, आईजी रेंज नवीन अरोरा, साइबर पीस फाउंडेशन के मेजर विनीत कुमार, एक्सपर्ट रक्षित टंडन, डीआईजी अलीगढ़ दीपक कुमार, संचालनकर्ता शिमोनी प्रसाद मौजूद रहीं। डेढ़ लाख लोग यूट्यूब, वेबिनार के माध्यम से कैंपेन में जुड़े। इसमें लोगों को साइबर फ्राड से बचने और अपराध के बार पुलिस के सहायता लेने के बारे में बताया गया। 62 दिवसीय कार्यक्रम में 28 सेशन होंगे। इससे पहले जून में 800 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
डीजीपी की मुख्य बातें
- साइबर अपराधी मालवेयर, फिशिंग, क्लोनिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, पोर्नोग्राफी, पायरेसी के माध्यम से लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। उन्हें आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानी देते हैं।
- साइबर अपराधी किसी बाउंड्री में नहीं होता है। वह विदेश में बैठकर भी अपराध कर सकता है। इसलिए पकड़ना आसान नहीं है।
- साइबर अपराधी आजकल पेंशनर्स को अपना शिकार बना रहे हैं। वह खाता अपडेट करने, नोमिनी बनाने के नाम पर जानकारी ले रहे हैं। किसी अनजान व्यक्ति को फोन पर अपने निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
- साइबर क्राइम की सूचना तत्काल दें। खाते से रुपये निकलते हैं तो जानकारी मिलने पर पुलिस खातों को फ्रीज करा देती हैं। इससे पैसा वापस मिल सकता है।
- यूपी में पहली बार साइबर मुख्यालय स्थापित किया गया है। इसमें एडीजी साइबर क्राइम के साथ ही एसपी और डीएसपी को नियुक्त किया है। यह केंद्र से संचालित पोर्टल का पर्यवेक्षण करते हैं। लखनऊ में एडवांस फोरेंसिक लैब खोलने की तैयारी है।
मोबाइल-कंप्यूटर जिंदगी का अहम हिस्सा बने
राजीव कृष्ण ने कहा कि आज मोबाइल और कंप्यूटर लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। इनके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकते। ऑनलाइन सामान मंगाना हो, टिकट बुक कराना, होटल बुकिंग, बैंक से रुपये निकालने हों, सब कुछ मोबाइल-कंप्यूटर ने आसान कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई तक मोबाइल और कंप्यूटर पर हो रही है। इसके साथ ही साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इससे बचाव के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
सावधान: आपके खाते पर साइबर अपराधियों की नजर, नए-नए तरीके अपना कर बना रहे ठगी का शिकार