सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी के आदेश में अवैध रूप से पेड़ों को काटने वाले लोगों के विरुद्ध नोटिस और जुर्माना लगाने के आदेश दिए थे। 5 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। ऐसे में मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, भरतपुर और एटा में पेड़ों की अवैध कटाई करने वालों का ब्योरा तलब किया है। तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण रिपोर्ट भेजने में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई है।
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टीटीजेड प्राधिकरण का गठन हुआ था। टीटीजेड को पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए पेड़ काटने पर प्रतिबंध है। इस कारण इंटीग्रेटिड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर सहित शासन की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं अधर में फंसी हैं।
9 साल में कटे 7,020 पेड़
- टीटीजेड में पिछले 9 साल में 7,020 पेड़ अवैध रूप से काटे गए। यह खुलासा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट से हुआ था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट टीटीजेड में प्रत्येक पेड़ की गिनती कराने और अवैध ढंग से काटे गए पेड़ों के मामले में संबंधित व्यक्तियों से जुर्माना वसूलने के आदेश टीटीजेड प्राधिकरण अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त को दिए हैं।
अवैध कटाई का रिपोर्ट कार्ड
- आगरा में 548 केस दर्ज हुए। 323 केस लंबित हैं। 822 प्रतिबंधित प्रजाति और 3,119 अन्य प्रजाति के पेड़ काटे गए।
- एटा में 88 केस दर्ज हुए। 6 केस लंबित हैं। 111 प्रतिबंधित प्रजाति और 19 अन्य प्रजाति के पेड़ काटे गए।
- फिरोजाबाद में 159 केस दर्ज हुए। 60 केस लंबित हैं। 337 प्रतिबंधित प्रजाति और 2,068 अन्य प्रजाति के पेड़ काटे गए।
- मथुरा में 235 केस दर्ज हैं। सभी केस लंबित हैं। 285 पेड़ प्रतिबंधित प्रजाति और 2,068 पेड़ अन्य प्रजाति के काटे गए।
- हाथरस में कोई केस दर्ज नहीं। 43 पेड़ प्रतिबंधित और 20 पेड़ अन्य प्रजातियों के अवैध रूप से काटे गए।
- भरतपुर से केस, काटे गए पेड़ व अन्य सूचनाएं सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी को नहीं मिली हैं।
- टीटीजेड में कुल 1,030 केस दर्ज हुए। 624 लंबित हैं। 1,598 प्रतिबंधित प्रजाति और 5,422 अन्य प्रजाति के पेड़ काटे गए।
(नोट: सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार)