मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा। बरनाहल की एक ग्राम पंचायतों में प्रधान और सचिव ने मिलाकर लाखों का फर्जीवाड़ा कर डाला। सोशल ऑडिट में मामला सामने आने पर खलबली मच गई है जिसके बाद प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
विकास खंड बरनाहल की ग्राम पंचायत मांसरपुर में वर्ष 2018-19 में लाखों का फर्जीवाड़ा किया गया। वर्ष 2019-20 में इसका सोशल ऑडिट किया गया। लॉकडाउन के चलते सोशल ऑडिट की रिपोर्ट देरी से आई। रिपोर्ट आने पर पता चला कि ग्राम पंचायत में कुल 17 लाख 24 हजार का फर्जीवाड़ा हुआ है। सोशल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार और तत्कालीन सचिव अल्केश कुमार ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने तीन नालों की खोदाई के नाम पर चार लाख, छह चक मार्ग के निर्माण में 6.76 लाख, चार तालाबों की खोदाई में 5.74 लाख और आवासों की मजदूरी में 76 हजार आदि का फर्जी भुगतान किया। रिपोर्ट में ये स्पष्ट किया गया है कि ये कार्य ग्राम पंचायत में कराए ही नहीं गए हैं। मामले की रिपोर्ट अब कार्रवाई के लिए जिला विकास अधिकारी कार्यालय को सौंपी गई है। रिपोर्ट में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। अब विभाग धनराशि की रिकवरी और कार्रवाई के लिए तैयारी में जुट गया है।
मनरेगा कार्यों में ही किया गोलमाल
मांसरपुर में प्रधान और सचिव ने बड़ी सफाई से पूरा फर्जीवाड़ा किया। दरअसल अगर रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को देखेंगे तो पता चलता कि सभी फर्जीवाड़े मनरेगा कार्यों में ही किए गए हैं। नाला या तालाब खोदाई से लेकर चक मार्ग निर्माण के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। क्योंकि ये सभी कार्य मिट्टी के हैं। बारिश के बाद इन कार्यों का सत्यापन करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में इन कार्यों का कोई प्रमाण नहीं रहता है।
हर साल सभी ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट किया जाता है। मांसरपुर में सोशल ऑडिट टीम ने फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दी है। रिकवरी के लिए आरसी जारी करने के साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेशित किया जाएगा।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।