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महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू, गंगाजली और कांवड़ की कंडियां बना रहे कारीगर

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सोरों (कासगंज)। महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई हैं। तीर्थनगरी में माघ पूर्णिमा 27 फरवरी से शुरू हो जाएगा। तीर्थनगरी के समीपवर्ती ग्राम कादरवाड़ी, होडलपुर आदि में गंगाजली और कावड़ की कंडियां कारीगारों द्वारा बनाई जा रही हैं। दुकानदारों ने भी दुकानों को मेले में लगाना शुरू कर दिया है।
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तीर्थनगरी के कांवड़ मेले में गृह जनपद व प्रदेश के अतिरिक्त राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य सुदूरवर्ती क्षेत्रों से कांवड़िए पहुंचते हैं। उनके द्वारा लहरा गंगा घाट, हरि की पदी, कछला घाट पर पैदल यात्रा कर गंगाजल ले जाकर शिवालयों में भोले का अभिषेक किया जाता है। मेले को देखते हुए कारीगरों द्वारा गगांजली तैयार की जा रही हैं। कादरवाड़ी में कारीगर दिन-रात तपती भट्टियों के आगे काम कर रहे हैं।
वहीं होडलपुर में कांवड़ के लिए कंडियों को कारीगरों द्वारा तेजी से बुना जा रहा है। वहीं दुकानदार भी मेले में अपनी दुकानों को लगाने में लगे हैं। कारीगर फारूख का कहना है कि गंगाजली की लगातार तैयारी की जा रही है। कारीगर असलम का कहना है कि यह काम वर्ष के सिर्फ तीन महीने तक ही चलता है। महाशिवरात्रि मेले से ही कारोवार की आस रहती है।
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प्रतिदिन दो से ढाई हजार कंडियां हो रहीं तैयार
होडलपुर में ग्रामीणों के परिवार कंडियों को बनाने में जुटे हैं। मोतीराम का कहना है कि गांव में प्रतिदिन लगभग दो से ढाई हजार कंडियां तैयार हो जाती हैं। सोहन सिंह का कहना है कि एक दिन में 25 कंडिया बना लेते हैं। जो 250 रूपये की बिक जाती हैं, जिनमें 100 रूपये बच जाते हैं। देवकरन का कहना है कि एक दिन में 50 से 60 कंडिया बना लेते हैं।
- तीर्थनगरी में कासगंज गेट, चंदन चौक, हरि की पदी, लहरा में कांवड़ मेला लगता है। पालिका द्वारा दुकानों के लिए ई-टेंडर के माध्यम से ठेका किया गया है। वहीं महाशिवरात्रि के मेले के लिए वाहनों की पार्किंग, प्रकाश एवं पेयजल व्यवस्थाएं आदि की जा रही हैं। - संताराम सरोज, अधिशाषी अधिकारी।
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