सोरों (कासगंज)। उत्तर भारत की प्रसिद्ध तीर्थनगरी सोरों में लगने वाले ऐतिहासिक मेले पर इस बार अनिश्चितता के बादल हैं। आयोजन की अनुमति ने मिलने से फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं इस बीच स्थिति साफ न होने पर भी बाहर से आने वाले दुकानदार तीर्थनगरी में पहुंचने लगे हैं, हालांकि अभी मेला ग्राउंड में पालिका ने जमीन आवंटन के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है लेकिन निजी जमीन को किराए पर लेकर कुछ दुकानदार अब तीर्थनगरी में दुकानें सजाने लगे हैं।
तीर्थनगरी के वार्षिक मेला मार्गशीर्ष के आयोजन को लेकर अभी कोई स्थिति साफ नहीं है। मेले में कंबल, पत्थर के सामान, टिन से बने सामान, खिलौने, सुर्मा व अन्य सामान की दुकानें लगाने वाले दुकानदार निजी जगह को किराए पर लेकर अपनी दुकानें लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां हर साल दूर दराज से दुकानदार पहुंचते हैं, लेकिन इस बार अनुमति न मिलने से असमंजस है तो फिलहाल कुछ ही दुकानदार यहां पहुंचे हैं और निजी भूमि किराए पर लेकर दुकानें सजाने लगे हैं।
मार्गशीर्ष अमृतकुंभ के अंतर्गत प्रथम मार्गशीर्ष एकादशी का स्नान पर्व 25 दिसंबर को पड़ रहा है। इस स्नान पर्व से एक माह पूर्व ही पालिका प्रशासन मेला ग्राउंड की जेसीबी से सफाई कराता है। गोरहा नहर से जल की स्वच्छ आपूर्ति के लिए बंबा की सफाई का कार्य भी मेला आयोजन से पूर्व कराया जाता है। मंदिरों की बुर्जों की रंगाई-पुताई व हरिपदी परिक्रमा मार्ग की पुताई का कार्य भी पालिका प्रशासन कराता है। लेकिन इस वर्ष यह सब कार्य कोविड संक्रमण के कारण प्रभावित हैं।
मार्गशीर्ष एकादशी भगवान वराह के अवतरण दिवस पर स्नान पर्व वाले दिन श्याम वराह मंदिर की ओर से शोभायात्रा निकालने की परंपरा काफी प्राचीन है। मार्गशीर्ष द्वादशी भगवान वराह के मोक्ष दिवस पर आदि वराह मंदिर द्वारा भगवान वराह की शोभायात्रा निकाली जाती है। मार्गशीर्ष त्रयोदशी को नागा साधु संत शोभायात्रा निकालकर हरिपदी में सामूहिक गंगा स्नान करते हैं। परंतु मार्गशीर्ष अमृत कुंभ के प्रमुख आयोजन भी प्रभावित नजर आ रहे हैं।