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ककोड़ा मेला न लगने से गंगा क्षेत्र के ग्रामीण हुए मायूस

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कासगंज ककोड़ा मेला का फाइल फोटो - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। गंगा के तट पर कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगने वाला ककोड़ा मेला इस बार नहीं लगेगा। यह मेला बदायूं जनपद और कासगंज जनपद के गंगा किनारे लगता है। गंगा के उत्तरी किनारे की ओर मुख्य रूप से मेला आयोजित होता है। इसकी व्यवस्था बदायूं का प्रशासन करता है। जबकि दक्षिणी किनारे पर लगने वाले मेले की व्यवस्थाएं जिला पंचायत के माध्यम से की जाती है। इस बार बदायूं और कासगंज प्रशासन ने मेला आयोजित न करने का निर्णय लिया है। इससे गंगा किनारे के गांव के लोग मायूस हैं। मेला लगने की यह 300 वर्ष पुरानी परंपरा है। जो इस बार टूटेगी।
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इस ककोड़ा मेले का इतिहास बदायूं जनपद के ककोड़ा गांव से जुड़ा है। यह मेला मुगलकालीन है। इस मेले के लिए बदायूं जिला पंचायत स्तर से व्यवस्थाएं की जाती हैं। यहां तक कि मेला परिसर में तंबुओं का शहर बनाए जाने की परंपरा है। जहां रहकर लोग प्रवास करते हैं। कार्तिक माह के इस मेले में गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। जिसके लिए मेला आयोजन की परंपरा है। ककोड़ा देवी मंदिर के महंत धरमगिरी बताते हैं कि मेला करीब 300 वर्षों से लग रहा है। जहां साधु संत भी आकर कल्पवास करते हैं। जिला पंचायत ने भी मेला न लगाने का निर्णय लिया है। कोरोना की संवेदनशीलता को देखकर यह निर्णय हुआ है। कादरगंज के असलम खान बताते हैं कि उन्होंने बचपन से यह मेला देखा है। यह पहला मौका होगा जब मेले का आयोजन नहीं हो रहा है।
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