कासगंज सोरों का सोमेश्वर भगवान का मंदिर जहां सावन में शिव उपासना को उमड़ते हैं भक्त।
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सोरों। श्रावण मास पूर्णिमा के बाद 25 जुलाई से शुरु हो रहा है। शिव की अर्चना के लिए यह पवित्र मास माना गया है। इस महीने में भगवान शिव की स्तुति करने से समृद्धी की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य राहुल वशिष्ठ ने बताया कि शिव पंचाक्षर मंत्र नम: शिवाय का जप पुण्यकारी है। ये जप श्रावण मास में करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यदि इसमें ‘प्रणव’ भी युक्त कर दिया जाए तो यह मंत्र अत्यधिक प्रासांगिक हो जाता है। प्रणव का अर्थ है साक्षात शिव। पुराण-शास्त्रों में प्रधानतया उन्हीं को प्रणव का वाच्यार्थ बताया गया है।
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर के प्रमुख दस अवतार हैं महाकाल, तारा, भुवनेश, षोडश, भैरव, छिन्नमस्तक गिरिजा, धूम्रवान, बगलामुख, मातंग और कमल। इन दस नामों के उच्चारण से जो भी व्यक्ति शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पण करता है, तो वह भक्ति व मुक्ति को प्राप्त कर शिवलोक में वास करता है। उन्होंने बताया कि श्रावणमास में चारों सोमवार को विधि-विधान पूर्वक सांयकाल में शिवपूजन व रुद्राभिषेक करना श्रेष्ठ होता है।
चार शैवतीर्थ हैं शूकर क्षेत्र सोरों में
शूकरक्षेत्र (सोरों) के अंतर्गत सोमतीर्थ, रूपतीर्थ, योगतीर्थ व आदित्यतीर्थ ये चार शैवतीर्थ हैं। यहां मनोभिलाषित फल की प्राप्ति के लिए रुद्राभिषेक व पूजन करना बहुत ही लाभप्रद है।