नौरमई। सरकार ने तो स्कूल के निर्माण के लिए पूरा बजट जारी किया, लेकिन जिम्मेदारों ने बजट का बंदरबांट कर लिया। इसके कारण स्कूल का निर्माण आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। बारिश में छत से पानी टपकता है तो कच्ची जमीन से जहरीले कीड़े निकल आते हैं। किसी को इसकी कोई परवाह नहीं है। सोमवार को बच्चों और शिक्षकों ने प्रदर्शन करके विरोध दर्ज कराया।
बरनाहल के गांव कैलाशपुर में 15 साल पहले वर्ष 2003 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्वीकृत हुआ था। तत्कालीन भवन प्रभारी ने भवन का निर्माण तो कराया, लेकिन इसमें केवल दीवारें खड़ीं करके लिंटर डाल दिया गया। लिंटर में भी मानकों की अनदेखी की गई। न तो दीवारों पर प्लास्टर किया गया और न ही फर्श बनवाया गया।
हाल ये है कि बारिश में छत से पानी टपकता है तो वहीं कच्ची जमीन में दलदल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार स्कूल में जहरीले कीड़े भी निकल चुके हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों को खतरा बना रहता है। कई बार ग्रामीणों ने मामले की शिकायत की, लेकिन हर बार केवल खानापूरी की गई। सोमवार को बच्चों और शिक्षकों ने प्रदर्शन कर स्कूल की मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही अधिकारियों ने कोई कदम न उठाया तो वे स्कूल का संचालन बंद कर देंगे।
हैंडपंप खराब, शौचालय खंडहर
भवन के साथ-साथ स्कूल में बना शौचालय खंडहर हो चुका है। इसके अलावा पानी के लिए लगाया गया हैंडपंप भी तीन साल से खराब पड़ा हुआ है। ग्राम पंचायत ने इसे सही कराने के लिए भी पहल नहीं की। ऐसे में बच्चे पानी पीने के लिए अपने घर जाते हैं।
धनराशि का बंदरबांट की जांच हो
स्कूलों की रंगाई-पुताई और अन्य कार्यों के लिए प्रतिवर्ष पांच से सात हजार रुपये विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में आता है, लेकिन राशि स्कूल कार्य में नहीं लगाई गई। प्रभारी प्रधान अध्यापिका स्वर्णलता बताती हैं कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लिखित में शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि आरएस यादव का कहना है कि धनराशि का बंदरबांट किया गया है, इसमें जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।
मामला काफी पुराना है, अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिर भी मामले की जानकारी कर जो भी उचित होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
शैलेंद्र उत्तम, बीईओ बरनाहल।