आगरा। देश की नामी निजी कंपनियों के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलटी (सीएसआर) फंड का गबन कर 5 हजार करोड़ रुपये विदेश भेजने के लिए जालसाजों ने सैकड़ों बैंक खातों का जाल बुना था। सीएसआर फंड की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रहे आयकर विभाग को अबतक करीब एक हजार से ज्यादा बैंक ऐसे खातों का पता चला है। इनकी मदद से मथुरा, अहमदाबाद और भीलवाड़ा में पंजीकृत ट्रस्टों के पदाधिकारियों ने करोड़ों रुपये चीन, हांगकांग, सिंगापुर और मलयेशिया समेत कई अन्य देशों में पंजीकृत शेल कंपनियों के बैंक खातों में भेजे। वहां से इस पैसे के बदले सोने को तस्करी कर भारत भेजा गया। विभाग अब इन खातों का ब्योरा खंगालने के लिए बैंकों से संपर्क साध रहा है।
अगस्त में प्रधान आयकर निदेशक अन्वेषण कानपुर की आगरा यूनिट ने मथुरा के राधा वैली निवासी सीए आशुतोष अग्रवाल के ठिकानों पर सर्च किया था। इस दौरान मथुरा के जन जागृति सेवा संस्थान ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का सीएसआर फंड मिलने और उसके कई अन्य खातों के जरिये विदेश भेजने की बात सामने आई थी। सर्च के दौरान ही जांच अधिकारियों ने हर साल करोड़ों का सीएसआर फंड लेने वाले जन जागृति सेवा संस्थान के अलावा अहमदाबाद के रागिनी बेन विपिन चंद्र सेवा कार्य ट्रस्ट और भीलवाड़ा के बृज मोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान के ठिकानों पर तलाशी ली। वहां से मिली जानकारी के बाद मुंबई निवासी सीए पंकज सोमानी और कोलकाता निवासी सीए सुप्रियो साहा के ठिकानों को खंगाला। सभी जगह से मिले दस्तावेजों के बाद अब तक की जांच में विभाग को करीब पांच हजार करोड़ रुपये के विदेश भेजे जाने की जानकारी मिली है।
शेल कंपनियों की जानकारी जुटाने के लिए कोशिश
विदेश में स्थित शेल कंपनियों के जिन बैंक खातों में भारत के बैंक खातों से रकम गई, उनकी जानकारी जुटाने के लिए विभाग ने कोशिश शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार संबंधित देशों की सरकारों से पत्राचार कर जानकारी जुटाने के लिए विभाग ने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा है।