कासगंज। बाढ़ प्रभावित पटियाली क्षेत्र में किसान बेहद परेशान हैं। खेतों में भरा बाढ़ का पानी अभी भी नहीं निकल पाया है। इससे किसानों की धान, मक्का, बाजरा, आदि की फसलें खेतों में गिरकर सड़ गई हैं। किसान बेहद परेशान हैं और उनकी निगाह प्रशासन की आर्थिक मदद पर टिकी हुई है। अभी तक फसलों की क्षति के आकलन का काम पूरा नहीं हो सका है। पट्टाधारक किसान सबसे अधिक परेशान हैं क्योंकि उन्होंने खेत पट्टे पर लेकर फसल तैयार की थी जो बर्बाद हो गई।जिले में करीब 8 दिन तक गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ जैसा असर रहा। गंगा के तटीय इलाकों के 25 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। बाढ़ के साथ नगला खंदारी, नेथरा और नीबिया, असदगढ़ के बांध कट जाने के कारण स्थिति और विकराल हो गई। इससे हजारों हेक्टेयर खेतों में खड़ी फसलों में पानी भर गया। किसानों को उम्मीद थी कि पानी वापस लौट जाएगा, लेकिन पानी की निकासी अभी तक नहीं हो पाई है। मौजूदा समय में भी तमाम खेतों में पानी भरा हुआ है और फसलें पानी में गिर कर सड़ गई हैं। राजेपुर कुर्रा, सनौड़ी, नेथरा, नगला खंदारी, नगला दिपी, नगला जयकिशन, मूंझखेड़ा, नगला दुरजन, नगला हंसी सहित तमाम गांव ऐसे हैं जहां सर्वाधिक क्षति हुई है। किसान लगातार प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अभी तक प्रशासन के द्वारा फसलों की क्षति का आकलन पूरा नहीं कराया जा सका है। जगह जगह पानी भरा होने के कारण सर्वेक्षण में दिक्कतें आ रही हैं। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन को फसलों की क्षति के आकलन के लिए निर्देशित किया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद किसानों को फसलों की क्षति के सर्वेक्षण में तेजी आने की उम्मीद बनी है।