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धान, मक्का, गेहूं का 25 प्रतिशत कम मिल रहा दाम

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मैनपुरी। रबी और खरीफ दोनों ही फसलों में इस बार किसानों को झटका लगा है। धान, मक्का और गेहूं का 25 प्रतिशत कम दाम किसानों को मिल रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर नियमों के फेर में उलझकर अन्नदाता अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं।
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वर्तमान में धान की फसल की कटाई का काम जिले में जोरों पर है। 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुवाई होने से पैदावार भी अधिक होती है। इस बार एक हजार रुपये से लेकर 1500 रुपये प्रति क्विंटल में धान बिक रहा है। बीते वर्ष धान दो हजार रुपये प्रति क्विंटल बिका था। मक्का भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल से 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है।
जबकि बीते वर्ष मक्का भी 1500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। दोनों ही फसलों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। रबी की फसल का भी बुरा हाल है। बीते वर्ष अक्तूबर में जहां गेहूं की कीमत 1900 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही थी। इस बार कीमत 1500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है।
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क्रय केंद्रों से बनाई दूरी
वर्तमान में जिले में समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए 15 धान क्रय केंद्र और छह मक्का क्रय केंद्र बनाए गए हैं। एक अक्तूबर से संचालित धान क्रय केंद्रों पर केवल मोटे धान की ही खरीद की जा रही है। जिले में पतला धान ही अधिकांश किसान उगाते हैं, इसलिए यहां किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। उप मंडियों में खोले गए मक्का क्रय केंद्रों पर 15 अक्तूबर से अब तक खरीद शून्य है।
सांसद के आदेश का भी नहीं हो सका पालन
राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह ने अनुश्रवण समिति की बैठक में धान की कम कीमत का मुद्दा उठाया था। उन्होंने जिला प्रशासन को आदेश दिए थे कि कहीं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर धान की बिक्री न हो। इस आदेश का पालन नहीं कराया जा सका।
बोले किसान
कभी भी किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं दिलाया जा सका। मंडी में इस बार तो सभी फसलों की हालत खराब है। किसानों को फसलों में लागत जेब से देनी पड़ रही है।
सुधीर कुमार, सड़।
धान की अगर किसानों को सही कीमत ही दिलानी है तो क्रय केंद्रों पर सभी धान खरीदे जाने चाहिए। केवल मोटे धान की खरीद करना किसानों के साथ अन्याय नहीं है क्या।
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धीरसिंह, दहीपगार।
पहले ऊंची कीमत पर बिक्री के लिए पतले धान की खेती को प्रोत्साहित किया गया। अब सरकार केवल मोटे धान को ही खरीद रही है। इससे किसान परेशान हैं।
रामानंद, बड़ौला।
मंडी में आढ़ती मनमाने दामों पर धान की खरीद कर रहे हैं। गेहूं का रेट भी इस बार बहुत कम है। किसान दोनों ही फसलों में बरबाद होने की कगार पर आ गया है।
सतीश, घुमर्रा।
निर्यात रुकने के चलते गिरी धान की कीमत
देश से धान का निर्यात न होने के कारण धान की कीमतें इस बार कम हैं। अगर सरकार निर्यात को मंजूरी दे देती है तो कीमतें बढ़ने की पूरी संभावना है।
नवीन कुमार कोहली, मंडी सचिव
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