बंदर अब तक घरों में ही नुकसान कर रहे थे लेकिन अब इनसे बिजलीघरों को खतरा बढ़ गया है। खतरा भी ऐसा कि अगर इनके उत्पात पर काबू न पाया गया तो आगरा और मथुरा जिले की बिजली आपूर्ति पर संकट आ सकता है।
मामला 400 केवी आगरा साउथ उपकेंद्र किरावली, डावली का है। यह उपकेंद्र आगरा और मथुरा की बिजली आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) ने जिलाधिकारी से उत्पाती बंदरों से छुटकारे की गुहार लगाई है।
यह उपकेंद्र अत्याधुनिक जीआईएस (गैस इंसुलेटेड सिस्टम) पर आधारित है। इसमें बहुत महंगे और संवेदनशील उपकरणों का प्रयोग किया गया है। मगर, उत्पाती बंदर इस उपकेंद्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उपकेंद्र की संपत्ति को पहुंचा रहे नुकसान
हाल ही में यूपीपीटीसीएल के अधिशासी अभियंता संजय शर्मा ने जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले कुछ समय से उपकेंद्र पर बंदरों की संख्या बढ़ रही है। लगभग सौ बंदरों द्वारा निवास बना लिया गया है। उपकेंद्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
बहुत बार बंदरों के उत्पात की वजह से आगरा एवं मथुरा शहर की बिजली आपूर्ति में भी व्यवधान उत्पन्न हो चुका है। इसके अलावा आसपास के खेतों में फसलें बर्बाद कर रहे हैं, जिससे उपकेंद्र के कर्मचारियों को किसानों का आक्रोश भी झेलना पड़ता है। अधिशासी अभियंता ने डीएम से उपकेंद्र की आगरा एवं मथुरा की बिजली आपूर्ति सुचारु रखने के दृष्टिगत बंदरों के डी-लोकेशन की मांग की है।
एक भी बंदर नहीं पकड़ा
प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव ने 26 फरवरी 2009 को नगर आयुक्त को 500 उत्पाती बंदर पकड़ने और इन्हें पीलीभीत वन प्रभाग के महोफ देवरिया और माला रेंज में छोड़ने की अनुमति दी थी। वन विभाग ने बंदरों को पकड़ने की परियोजना 9 दिसंबर 2011 को भेजा था। 9.63 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का अनुरोध प्रमुख सचिव नगर विकास को 18 जनवरी 2012 को किया गया था। अनुमति मिलने के बावजूद एक भी बंदर नहीं पकड़ा गया।
सरकारी कार्यालयों में खौफ
कलक्ट्रेट, एसन मेडिकल कालेज, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन, आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन, ताजमहल, आगरा किला, पुलिस लाइन आदि जगहों पर बंदरों का खूब आतंक है।