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गैर कानूनी है कमेले के बाहर काटे गए पशुओं का मांस बेचना

Fri, 24 Mar 2017 12:38 AM IST
गैर कानूनी है कमेले के बाहर काटे गए पशुओं का मांस बेचना
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गैर कानूनी है कमेले के बाहर काटे गए पशुओं का मांस बेचना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मांस की दुकानों पर कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी यह जानकर हैरान रह गए कि कई दुकानदारों को मांस बिक्री के नियम ही नहीं मालूम हैं। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप कुमार गुप्ता और सीओ छत्त्ता बीएस त्यागी ने पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेश शर्मा से नियम कानून की जानकारी देने के लिए कहा। उन्होंने दुकानदारों को इसका पाठ पढ़ाया।
पहली शर्त यह है कि दुकानदार के पास नगर निगम और एफएसडीए का लाइसेंस होना चाहिए। दूसरी यह कि दुकान पर केवल कमेले में काटे गए भैंस / बकरे का मांस बेचा जा सकता है। कमेले के अलावा अन्य कहीं भी स्थान पर जानवर काटे जाने की अनुमति नहीं है।
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तीसरी शर्त यह है कि जानवर को कमेले में काटे जाने के बाद उसके मांस पर नगर निगम की मोहर लगनी चाहिए। चौथी यह कि मांस की दुकान पक्की हो, पूरी तरह से ढकी हुई हो। आस पास गंदगी न हो। चौथी यह कि दुकान मंदिर या मस्जिद के आस पास नहीं होनी चाहिए।
पांचवीं शर्त यह है कि दुकान से किसी को आपत्त्ति नहीं होनी चाहिए। अगर कोई शिकायत करता है तो दुकान को बंद कराया जा सकता है। छठी यह कि कमेले से मांस लाने के बाद 24 घंटे में बिक्री हो जानी चाहिए। इसके बाद मांस खराब हो जाता है।
डा. योगेश शर्मा से दुकानदारों ने पूछा कि क्या मुर्गे और मछली का मीट भी कमेले से लेना होगा? उन्होंने कहा, नहीं। इन्हें दुकान में काटा जा सकता है लेकिन गंदगी नहीं होनी चाहिए। उधर, कमेले में पशु कटान की अनुमति और शहर में चल रही मांस की दुकानों को देखकर अनुमान है कि कमेले से सिर्फ 20 फीसदी दुकानदार ही मांस खरीद रहे हैं।
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ये हैं पशुवधशालाओं के संचालन के नियम
. दुधारू, गर्भित एवं प्रजनन योग्य पशुओं और प्रतिबंधित पशुओं का वध पूर्णतया प्रतिबंधित है।
. निर्धारित क्षमता के अनुसार पशु वध हो। पशुओं का एकल प्रवेश हो, जहां पर सीसीटीवी कैमरा लगा हो।
. पशुओं का विवरण हो। कहां से लाये, परिवहन का माध्यम, वाहन की संख्या, चालक का नाम, पशु की जानकारी।
. प्रत्येक हिस्से की निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाए जाएं।
. एक पशु चिकित्सक द्वारा आठ घंटे में 96 पशुओं का नियमानुसार परीक्षण किया गया हो।
. पहले एंटीमार्टम और वध के बाद पोस्टमार्टम की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण के विशेष में निर्देशों का पालन करना होगा।
. पशुवध से जनित ठोस/द्रव अपशिष्टों के निस्तारण की आवश्यक व्यवस्था।
. राज्य स्तरीय समिति की अनुमति के बिना संचालित न हो।
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