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टाइल्स काटने पर आवाज हुई तो जूनियर डॉक्टरों ने मजदूरों को पीटा, रिपोर्ट दर्ज

Fri, 15 Mar 2019 12:23 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पीड़ित मजदूर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों पर एक बार फिर मारपीट का आरोप लगा है। इस बार उन्होंने इमरजेंसी में टाइल्स लगा रहे मजदूरों को बुरी तरह से पीटा। ठेकेदार की तहरीर पर थाना एमएम गेट में तीन जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ एनसीआर दर्ज की गई है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में जल निगम सीएंडडीएस की ओर से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। दोपहर लगभग तीन बजे नरेश, रवि कुमार और सूरज निवासी बिचपुरी टाइल्स लगा रहे थे। मशीन से टाइल्स कटने से आवाज हो रही थी। आरोप है कि जूनियर डॉक्टर संदीप आए। उन्होंने कहा कि शोर बहुत हो रहा है, इसे बंद कर दो। मजदूरों ने कहा कि टाइल्स काटना बंद कर देंगे तो काम पूरा नहीं होगा। 

इस पर जूनियर डॉक्टर ने एक मजदूर को लात मार दी। दूसरा मजदूर बचाने आया तो डॉ. संदीप, डॉ. प्रतज्ञ और डॉ. सचिन ने मारपीट की। तीनों मजदूरों की पिटाई लगाई। रवि कुमार के सिर में लोहे की रॉड मार दी। मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई। घटना से इमरजेंसी में अफरातफरी मच गई। चौकी से पुलिस पहुंच गई। 
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ठेकेदार ने दी तहरीर

बाद में ठेकेदार हितेश कुमार ने थाना एमएम गेट में तहरीर दी। इसमें मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले भी जूनियर डाक्टरों ने मारपीट की थी। इसकी शिकायत प्राचार्य से की थी। उन्होंने आगे से इस तरह की घटना नहीं होने देने का आश्वासन दिया था। जब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। 

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ जीके अनेजा ने बताया कि मजदूर और जूनियर डाक्टरों में झगड़ा हुआ था। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। 

पहले भी कर चुके हैं मारपीट

जूनियर डॉक्टर मरीज और तीमारदारों के साथ पहले भी मारपीट कर चुके हैं। पिछले साल जूनियर डॉक्टरों ने अशोका बार में तोड़फोड़ कर जमकर उत्पात मचाया था। खेरागढ़ के मरीज और तीमारदारों को इमरजेंसी में बंद कर पीटा था। 

इसके अलावा भी कई मामले सामने आ चुके हैं। बार में तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में पुलिस ने जूनियर डाक्टरों के खिलाफ थाना हरीपर्वत में मुकदमा भी दर्ज किया था। कई जूनियर डॉक्टर गिरफ्तार कर जेल भेजे थे। इसके बावजूद घटनाएं सामने आ रही हैं। 
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