रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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जनपद में पिछले चार सालों में दहेज हत्या के 30 से 40 मामले आए हैं। इनमें ससुरालीजन ही आरोपी होते हैं। ऐसे मामले इक्का दुक्का ही हैं जिनमें बहू पर ससुरालीजन की हत्या करने या आत्महत्या पर मजबूर करने का आरोप हो। इससे तो यही लगता है कि बहू ही ज्यादा परेशान हैं। हालांकि ऐसे केस भी आ रहे हैं जिनमें ससुरालीजन की ओर से बहुओं की शिकायत की जा रही है। कोर्ट तक पहुंच रहे मामलों में 80 फीसदी ससुरालीजनों के खिलाफ हैं, तो 20 प्रतिशत में बहुएं आरोपी है।
महिला थाना में हर महीने 100 शिकायतें दहेज उत्पीड़न की आती हैं। इनकी जांच में 70 फीसदी तक में सास-बहू के झगड़े निकलते हैं। या फिर पत्नी की पति से कोई बड़ी नाराजगी होती है। उसका शराब पीना, पीटना, अपशब्द बोलना और खर्च न देना। परिवार परामर्श केंद्र के सदस्य रहे पारस गोयल बताते हैं कि बहुओं की शिकायत दहेज की होती है। ससुराल पक्ष कहता है कि बहू दहेज केस में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी देती है।
अधिवक्ता अर्चना शर्मा का कहना है कि सास भी बहुओं के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत थानों में करती हैं, लेकिन उनके मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते हैं। पुलिस बहू के कहने पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर लेती हैं। कोर्ट में भी सास बहुओं के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत कर रही हैं। अधिवक्ता अचल शर्मा ने बताया कि अगर बहु से परेशान होकर सास ने सुसाइड किया है तो बहू के खिलाफ धारा 306 के तहत केस बनता है।
दीवानी में आने वाले 20 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें सास की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है।
दरवेश यादव, उपाध्यक्ष, यूपी बार काउंसिल
बेटे पर केस कर सकते है मां-बाप
यूपी बार काउंसिल की उपाध्यक्ष दरवेश यादव ने बताया कि हिंदू एक्ट की धारा 19 के तहत मां-बाप का साथ छोड़कर बहु के साथ रहने वाले बेटे से हर्जाना मांग सकते हैं। बेटे के द्वारा खर्च न दिए जाने पर उसे पैतृक अधिकार से वंचित कर सकते हैं।