‘दिवाली पर पत्नी से लड़ाई होने के कारण वह मायके गई थी। अब सुलह के बाद पत्नी ने अलमारी में रखे पुराने नोट निकाले हैं, जिन्हें जमा कराने आया हूं’
बैंक आफ इंडिया में पुराने नोटों को जमा कराने आए ग्राहक ने डीनोमिनेशन फार्म में जब यह लिखा तो बैंक अधिकारी भी चकरा गए। पांच हजार रुपये से ज्यादा रकम में 500-1000 रुपये के बंद हो चुके नोटों को जमा करने के लिए बैंकों ने फार्म भरवाना मंगलवार से शुरू कर दिया, जिसमें अब तक बंद नोट जमा न करने की वजह पूछी गई। ग्राहक इसी तरह के अजब-गजब तर्क बंद नोटों को जमा कराने के लिए दे रहे हैं। किसी ने पत्नी से लड़ाई को देरी की वजह बताया तो किसी ने बीमारी का तर्क दिया।
5 हजार से ज्यादा रकम जमा कराने आए लोगों को फार्म भरने में भी दिक्कतें आईं। एक्सचेंज की तरह से बंद नोटों का ब्योरा इस फार्म पर देने के साथ ही देरी की वजह भी बतानी है। इस पर दो बैंक अधिकारियों को हस्ताक्षर भी करने अनिवार्य हैं। ऐसे में न केवल बैंक कर्मचारी, बल्कि ग्राहक भी अचकचा रहे हैं। कुछ लोगों ने फार्म पर लिखा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने जल्दबाजी न करने की अपील की थी, इस वजह से वह भीड़ छंटने के इंतजार में थे, इसलिए अब बंद नोट जमा कराने आए हैं। कुछ बैंकों ने ऐसे तर्क देने पर फार्म दुबारा भरवाया और केवल बीमारी को वजह बताकर दर्ज कराया।
बैंकों के बाहर कतार हो गई छोटी
जनधन एकाउंट में जमा की गई रकम को निकालने की लिमिट तय करने और अब 5000 से ज्यादा रकम में बंद नोटों को जमा करने पर कारण बताने की बाध्यता के चलते बैंकों के बाहर कतार कम हो गई। मंगलवार को शहर की उन बैंकों में एक चौथाई लोग ही नजर आए, जिनमें सुबह 7 बजे से ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती थीं। संजय प्लेस, बोदला, जयपुर हाउस, लोहामंडी, सिकंदरा, आवास विकास, खंदारी, कमला नगर, फतेहाबाद रोड की बैंक शाखाओं में कैश जमा करने वालों की कतार कम रही। भीड़ भाड़ वाली शाखाओं, जिनमें हर दिन 450 से ज्यादा लोग पहुंच रहे थे, उनमें मंगलवार को महज 175-200 लोग ही पहुंचे।
कैश किल्लत पर बैंक कर्मियों का आंदोलन 28 से
प्राइवेट बैंकों को ज्यादा नकदी देने और एटीएम में कैश उपलब्ध न कराने के आरोप लगाते हुए यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन 28 दिसंबर से आंदोलन करेगा। यूनियन महामंत्री मदन मोहन राय ने बताया कि 28 दिसंबर को सभी केंद्रों पर प्रदर्शन किये जाएंगे। 29 दिसंबर को वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। 2 जनवरी को बैंक कर्मी बैज धारण करेंगे और 3 जनवरी को सभी राज्यों की राजधानियों तथा रिजर्व बैंक के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। उन्हाेंने कहा कि बैंककर्मियों ने नोटबंदी में दिन रात काम किया, लेकिन न जनता और न ही कर्मचारियों को फायदा हुआ। 14 दिसंबर को आरबीआई के कार्यालयों पर प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी। प्राइवेट बैंकों को कैश कितना दिया गया, इसका खुलासा आरबीआई को करना चाहिए। बैंकिंग स्टाफ आरबीआई के खिलाफ यह चरणबद्ध आंदोलन करेगा।