लाल के इंतजार में पथरा गई आंखें
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जैसे दिव्य के अपहरण के बाद उसके परिवार का हाल बेहाल है, ऐसी ही पीड़ा से जिले के 50 परिवार गुजर रहे हैं। कई तो ऐसे हैं, जिनकी आंखें अपने जिगर के टुकड़े के इंतजार में पथरा गई हैं। लाल को गुम हुए दिन, सप्ताह, महीने नहीं, कई साल बीत गए, पर कुछ पता नहीं चल पाया। पुलिस ने केस अपहरण में दर्ज किया, थानों पर पोस्टर लगवाए और फिर फाइल बंद कर दी। इस साल लापता हुए 21 बच्चों में आठ का अभी तक सुराग नहीं लग सका है। इनमें कमला नगर के इंटीरियर डिजाइनर संजय अग्रवाल का इकलौता बेटा बिट्टू उर्फ अभिषेक भी है। उसका अपहरण सात जनवरी को किया गया था। एक बच्चे ने देखा था कि उसे बदमाश सफेद रंग की वैन में डालकर ले जा रहे हैं, लेकिन पुलिस आज तक न बिट्टू का कुछ पता लगा पाई और न अपहरण करने वाले गिरोह का। इसी तरह नाला बुढ़ान सैयद से ईश्वर दयाल का पुत्र शिवा (14) लापता हुआ। उसका भी कुछ पता नहीं चल सका। नरायच के महेंद्र सिंह और उनका पूरा परिवार अपने लाडले नितेश (11) की तलाश में दर दर भटक रहा है। गांव तरखिया अछनेरा के भजन लाल का बेटा खरग सिंह (15) और जगदीशपुरा के सुभाष नगर अलबतिया के राजकुमार का पुत्र पारस दीक्षित ( 14) भी लापता चल रहा है।
हमें समझ नहीं आ रहा कि अब हम क्या करें, हर कोशिश करके देख चुके हैं - संजय अग्रवाल ( बिट्टू के पिता)
पारस के लापता होने के बाद पुलिस ने एक दो बार घर आकर बात की, इसके बाद कोई पूछने तक के लिए नहीं आया - राजकुमार ( पारस के पिता )