आगरा में जैसे ग्रोवर दंपती हत्याकांड राज बनकर रह गया, वैसे ही प्रॉपर्टी डीलर बबलू यादव की हत्या से भी पुलिस रहस्य का पर्दा नहीं उठ पा रही है। बबलू के परिजन भारी गुस्से हैं। बबलू के गांव ककरैठा में भी उबाल है।
यादव समाज और सपा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर पुलिस के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी चल रही है। दो बार धरना प्रदर्शन हो चुका है। दोनों ही बार आश्वासन मिले जिनमें दम नहीं निकला। अब खुलासा होने तक अनशन की तैयारी चल रही है।
ककरैठा गांव निवासी बबलू यादव की हत्या 15 दिसंबर 2018 को होली पब्लिक स्कूल, सिकंदरा के सामने हुई थी। दो बाइक सवार बदमाशों ने यह वारदात की थी। वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, लेकिन बदमाश नकाबपोश थे। बाइक का नंबर फुटेज में स्पष्ट नजर नहीं आया।
शुरू में पुलिस फुटेज में उलझी रही। इसके बाद बबलू के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल का अध्ययन चलता रहा। उसने प्रॉपर्टी के जो सौदे कराए, उनकी फाइलों का अध्ययन किया गया लेकिन नतीजा कुछ निकला नहीं।
अब पुलिस के पास कोई लाइन नहीं है। अधिकारी पीड़ितों को दिलासा दे रहे हैं लेकिन काम चल रहा है, केस जल्द खुलेगा लेकिन उम्मीद नजर नहीं आ रही है। बबलू के परिजनों का कहना है कि इस बार बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
एमएलसी के आश्वासन पर धरने से उठे थे
पिछली बार जब बबलू के परिजन और ककरैठा गांव के लोग एसएसपी ऑफिस के बाहर धरना दे रहे थे, तब सपा के एमएलसी दिलीप यादव पहुंचे। उन्होंने एडीजी जोन अजय आनंद से उनके दफ्तर में जाकर वार्ता की। इसके बाद धरना दे रहे लोगों को घर वापस जाने के लिए राजी किया।
उन्होंने कहा था कि पुलिस को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। आरोप है कि इसके बाद से दिलीप यादव पीड़ितों का हाल पूछने तक नहीं आए हैं। बबलू के परिजनों का कहना है कि उनसे बात हुई तो बताया कि वो मामला विधान परिषद में उठा चुके हैं। इसका नतीजा क्या हुआ? इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।