पहले कार का लॉक खोलने के लिए चोर नकली चाबी या मास्टर की का इस्तेमाल करते थे, या फिर कार के लॉक को तोड़कर उसे चुराकर ले जाते थे, लेकिन अब हाईटेक सिक्योरिटी के साथ चोर भी हाईटेक हो गए हैं। बिना चाबी के ही महंगी से महंगी कारों को चोर लैपटॉप की मदद से हैक कर लेते हैं और सिक्योरिटी सिस्टम डी कोड कर उसे लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं। आवास विकास कालोनी के सेक्टर 10 में दो दिन पहले एक घर से चोरों ने कुछ इसी तरह कार चोरी का प्रयास किया, लेकिन परिवारीजनों के जगार होने से वारदात को अंजाम नहीं दे सके।
आवास विकास कालोनी के सेक्टर 12 डी निवासी अश्वनी कुमार की बहन सेक्टर 10 में रहती हैं। अश्वनी 21 सितंबर को बुलेरो गाड़ी से बहन के घर आए थे। रात में कार को घर के गेट पर खड़ा किया था। रात तकरीबन 12:30 बजे कार को चोरों ने चुराने का प्रयास किया। लेकिन घर में जगार हो गई और परिवारीजनों ने शोर मचा दिया। इस पर चोर भागने लगे। अश्वनी ने तीन चोरों को होंडा एमेज कार में बैठकर भागते हुए देखा। चोरो ने उनकी बुलेरो का सिक्योरिटी सिस्टम बेकार कर दिया था। चाभी लगाने पर भी कार स्टार्ट नहीं हो रही थी।
सीसीटीवी की फुटेज से पता चला कि चोराें ने लैपटॉप से कार का सिक्योरिटी सिस्टम डी कोड कर उसे स्टार्ट कर लिया था। इसकी जानकारी पर थाना सिकंदरा पुलिस पहुंच गई। मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कार चोरी करने वाला गैंग हाथ आ गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।
कैसे होता है डी-कोड
महंगी कारों को चोर लैपटॉप की मदद से चुरा रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि चोर पहले स्केल और तार की मदद से कार का डोर लॉक खोल देते हैं। सेंट्रल लॉकिंग होने पर वायर काटकर साउंड सिस्टम को ऑफ कर देते हैं। लॉक खुलते ही जानकार चोर कार को उसमें लगे विशेष पोर्ट से लैपटॉप को जोड़ देते हैं।
विशेषज्ञ के मुताबिक, इम्मोबलाइजर इंजन स्टार्ट करने वाले सर्किट को निष्क्रिय रखता है। यह इलेक्ट्रानिक कंप्यूटर मॉड्यूल (ईसीएम) पर काम करता है। चोर इसे डी-एक्टिवेट कर देते हैं। फिर लैपटॉप से ही स्टार्ट कमांड देकर गाड़ी चालू कर देते हैं। गाड़ी को चलाने के लिए पॉवर कंट्रोल यूनिट और बॉडी कंट्रोल मॉड्यूल को भी डी एक्टिवेट किया जाता है।
इम्मोबलाइजर ऑफ तो गाड़ी ऑन
इम्मोबलाइजर ऑन होने पर गाड़ी को स्टार्ट करने के लिए जरूरी व्हीकल सर्किल को निष्क्रिय कर देता है। यह इलेक्ट्रानिक कंप्यूटर मॉड्यूल सिस्टम (ईसीएम) के जरिये काम करता है। चाबी के साथ रेडियो पहचान टैग जुड़ा होता है, जो इग्निशन शुरू करने की इजाजत देने के लिए ईसीएम द्वारा पढ़ा जाता है।