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प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में वाद

Fri, 12 Feb 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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सरकार के आदेश को दरकिनार कर खेत पर जबरन कब्जा दिलाने के मामले में कोर्ट में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया गया है। कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज कर थाना से आख्या तलब की है।
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पचगाई खेड़ा निवासी मूलचंद ने वाद प्रस्तुत कर कहा कि गांव में उसकी जमीन थी, जिसका उसने करीब 30 साल पहले गांव के चौधरी ज्ञान सिंह के नाम पर कब्जानामा लिख दिया। तब से उसका ही कब्जा चला आ रहा था। मगर, सपा नेता ने सन 2006 में एक पूर्व मंत्री की मां के नाम एक लेखपाल से मिलकर बैनामा करा दिया। इस बैनामा को खारिज करने के लिए चौ. ज्ञान सिंह ने कोर्ट में वाद दायर किया। जिसमें सन 2009 में कोर्ट ने स्टे आदेश किया, लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर आरोपी गणों को जबरन कब्जा दिलवाया। इस दौरान खेत में खड़ी फसल को जेसीबी से नष्ट करवा दिया। विरोध करने पर ज्ञान सिंह को गाड़ी में बंद कर लिया। महिलाओं से अभद्रता की। वादी की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामाशंकर राजपूत और सुनील वशिष्ठ ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन दिसंबर 2014 को आदेश पारित किया था कि जिन संपत्ति और जमीन का वाद कोर्ट में विचाराधीन है, उनमें प्रशासन किसी प्रकार की दखलंदाजी नहीं कर सकता। बशर्ते जमीन सरकारी न हो। इस आदेश की प्रति भी संलग्न की गई है। इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि नियत की है।
मारपीट के आरोपियों को सजा
आगरा। अपर जिला जज नवम अनमोल ने थाना पिनाहट के मारपीट के मामले में आरोपी सुरेंद्र, उसके भाई धनीराम, दयाराम को साढ़े चार साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा उनके पिता भोगीराम को भी तीन साल की सजा और 18 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
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जमानत अर्जी खारिज
आगरा। स्पेशल जज (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) संतोष राय ने थाना सदर के अपहरण के मामले मेें आरोपी धौलपुर निवासी लक्ष्मीनरायन की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं फतेहपुर सीकरी के दहेज हत्या के मामले मेें मृतका ऊषा की सास भूरी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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