आरोप है कि शेखर यादव, उसकी पत्नी सरोज यादव और एक अन्य रेनू यादव ने मनोज पर दबाव बनाया कि वह पैरवी न करे। उसने मना कर दिया तो शेखर के मित्र राम सहाय यादव ने फोन पर धमकी दी। मनोज का कहना है कि धमकी की रिकार्डिंग हो गई।
मनोज ने बताया कि इसके बाद 21 अगस्त 2015 को शाम पांच बजे उसे, उसके तीनों बेटों नीरज, आकाश और हिमांशु को शेखर, सरोज, राम सहाय यादव, छत्ता थाना के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह, एसएसआई सतीश चंद साहू, जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज सुधीर कुमार को बुलाया और थाने में बंद करा दिया। रात के दस बजे छोड़ा गया।