जिला अस्पताल में अलाव की व्यवस्था न होने के चलते ठिठुरते तीमारदार।
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एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी में एक बार फिर डाक्टरों का अमानवीय चेहरा सामने आया। डाक्टरों ने एचआईवी पाजिटिव महिला का इलाज करने से मना कर दिया। परिजन डाक्टर से लेकर प्राचार्य कार्यालय तक गुहार लगाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर परिजनों ने विधायक से फरियाद लगाई, उनके आने के बाद शाम को करीब पांच बजे इलाज शुरू हो सका।
सैंया की 50 साल की महिला एचआईवी पॉजिटिव है। इसका एसएन के एआरटी सेंटर में इलाज चल रहा है। गुरुवार की सुबह घर में गिरने से नाक में चोट लग गई। खून बहने के साथ वह बेहोश हो गई। परिजनों ने 108 पर फोन किया तो एंबुलेंस उसे इमरजेंसी में सुबह करीब 10 बजे छोड़ गई। महिला को पहले सर्जरी विभाग और फिर वहां से ईएनटी विशेषज्ञ के पास भेज दिया। परिजनों का आरोप है कि जूनियर डाक्टरों को जैसे ही बताया कि महिला एचआईवी पाजिटिव हैं उन्होंने इलाज से मना कर दिया। इस पर परिवार के लोगों ने आगरा पाजिटिव पीपल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव अनिल से संपर्क किया। उन्होंने डाक्टरों से इलाज के लिए गुहार लगाई तो इलाज की सुविधा नहीं होने और पर्चे पर हायर सेंटर ले जाने को लिख दिया। पर्चा लेकर परिजन प्राचार्य कार्यालय भी गए। वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर विधायक भगवान सिंह कुशवाहा को फोन किया। वह करीब साढ़े चार बजे आए और अधिकारियों से बात की। तब विशेषज्ञ चिकित्सक आए और शाम पांच बजे इलाज शुरू हुआ।
- इमरजेंसी में डाक्टरोें का रवैया अमानवीय है। एचआइवी पीड़ित की जानकारी पर डाक्टरों ने उसके इलाज से मना कर दिया। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी।
- भगवान सिंह कुशवाहा, विधायक खेरागढ़
- जूनियर डाक्टरों ने मरीज का इलाज शुरू कर दिया था। वरिष्ठ चिकित्सक आपरेशन में व्यस्त थे। आपरेशन खत्म होने के बाद मरीज का आपरेशन किया है।
- डा. सरोज सिंह, प्राचार्य
ईएमओ तक थे गायब
इमरजेंसी में चिकित्सकीय सेवाएं बदहाल हैं। यहां इमरजेंसी मेडिकल आफिसर (ईएमओ) तक गायब रहते हैं। एचआईवी पीड़िता के इलाज के वक्त भी ईएमओ मौजूद नहीं थे। विधायक काफी देर तक उनके कार्यालय में इंतजार करते रहे। विधायक का कहना है कि पांच बजे तक भी ईएमओ नहीं आए।