खंदारी के ग्रोवर दंपति हत्याकांड में पुलिस ने कातिलों की तलाश नए सिरे से शुरू तो की है लेकिन यह काम अब पहले से भी मुश्किल हो चुका है। पुलिस टीम के सामने क्राइम सीन जो नहीं है। ऐसे में कातिलों तक पहुंचने के लिए एक ही रास्ता दिखाई दे रहा है, वो है मौका ए वारदात से लिए गए फिंगर प्रिंट। पुलिस इसी पर चलेगी। जितने भी लोग शक के दायरे में आए हैं, उनके फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे।
इन्हें मौके से लिए गए निशान से मिलान के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। 14 नवंबर 2014 की रात हुई इस घटना के खुलासे के लिए इस बार दो आईपीएस एक साथ लगे हैं। एक सीओ हरीपर्वत अनुराग वत्स और दूसरे एसपी सिटी सुशील घुले। जांच की प्रगति की रिपोर्ट भी दो आला अफसरों को भेजी जानी है,
डीजीपी जावीद अहमद और आईजी क्राइम आरके स्वर्णकार। ऐसे में हर कदम सोच समझकर उठाया जाएगा।
फिंगर प्रिंट उस अलमारी से मिले थे, जिसे कातिलों ने खोला था। पुलिस के पास इसकी रिपोर्ट मौजूद है। अगर किसी संदिग्ध के फिंगर प्रिंट से इनका मिलान हो जाता है तो कातिल उसी को मानकर जांच आगे की जाएगी।
एसपी सिटी ने बताया कि फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट उन्होंने देखी है। क्राइम सीन के बारे में तैयार की गई उस समय की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया है। मौके पर फिंगर प्रिंट मिले थे। 30-35 लोग शक के घेरे में आए थे। उनसे पूछताछ भी गई थी।
लूटे गए सामान की सूची मांगी
पुलिस शुरू से कह रही है कि वारदात का मकसद लूट नहीं रहा। उधर ग्रोवर दंपति के इकलौते बेटे इसके विपरीत कह रहे हैं कि बदमाश लूट करके गए। अब पुलिस ने उनसे लूटे गए सामान की पूरी सूची मांग ली है।