शैलेंद्र अग्रवाल जालसाजी प्रकरण में फंसे पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच फिलहाल बंद हो गई है। एसआईटी की रिपोर्ट पर डीजीपी ऑफिस से कोई जवाब न आने के चलते ऐसा किया गया है। इसी के चलते न तो इन अफसरों से सवाल जवाब किए गए, न ही शैलेंद्र को रिमांड पर लेकर सच जानने की कोशिश हुई। इस मामले में पिछले दस दिन में हुई एसआईटी की तीन बैठकों में कोई चर्चा भी नहीं की गई है।
एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र के साथ अधिकारियों के रिश्तों की जानकारी मिलते ही तत्कालीन डीजीपी एके जैन को सूचना दी गई थी। करीब एक महीने पहले जब एके जैन आगरा आए थे, तब भी उनके साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसके बाद उन्होंने जब एसआईटी का गठन किया और रिपोर्ट मांगी तो उन्हें वह भी भेज दी गई।
उन्हें यह भी बताया गया था कि दो पूर्व डीजीपी ने शैलेंद्र से मिलकर दरोगाओं को ट्रांसफर पोस्टिंग की बोली लगाई। एसआईटी को उम्मीद थी कि तत्कालीन डीजीपी इस मामले की सीबीसीआईडी या ईओडब्लू जांच कराएंगे या फिर एसआईटी से ही पड़ताल जारी रखने के लिए कहा जाएगा। लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। एके जैन रिटायर हो चुके हैं।
इससे पहले ही एसआईटी ने अफसरों की भूमिका की जांच बंद कर दी। जांच जारी रखने के लिए शक के घेरे में आए अधिकारियों से पूछताछ होना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एसआईटी को कॉल डिटेल से जो साक्ष्य मिले, उनके बारे में शैलेंद्र अग्रवाल की रिमांड लेकर पूछताछ होनी थी। एसआईटी के अधिकारी 15 दिन पहले तक रिमांड की बात कर रहे थे, लेकिन बाद में इरादा बदल दिया। एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इस केस में अधिकारियों की भूमिका मालूम करने की जांच नहीं चल रही है।