आगरा के थाना रकाबगंज क्षेत्र के मोहनपुरा में दो महीने पहले सात माह की गर्भवती देवरानी दुर्गेश की चाकू से हत्या जेठानी शालिनी ने ईर्ष्या में की थी। पुलिस की विवेचना में इस बात की पुष्टि हुई है। पुलिस ने दहेज हत्या की धारा को हत्या की धारा में तरमीम कर दिया।
केस के तत्कालीन विवेचक सीओ सदर विकास जायसवाल ने बताया कि दुर्गेश के पिता महेश चंद्र ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पति, सास, ससुर, जेठ और जेठानी को नामजद किया। जांच में घटना वाले दिन कई लोगों के बयान दर्ज किए गए थे।
तीन तथ्यों से दहेज के लिए हत्या और अन्य लोगों के शामिल नहीं होने की पुष्टि हुई। एक तो देवरानी और जेठानी घर में अलग-अलग रहती थीं। दोनों की रसोई अलग थीं। दूसरा जिस समय जेठानी ने देवरानी पर वार किए उस दौरान कमरा अंदर से बंद था।
काम पर गए थे सास, ससुर और पति
तीसरा घटना के समय दोनों के पति, सास और ससुर काम पर गए थे। उनकी लोकेशन भी अलग-अलग आईं। दहेज मिलता तो जेठानी को फायदा नहीं होता। उधर, हत्या के पीछे जेठानी का देवरानी के प्रति मन ही मन ईर्ष्या रखना पाया गया।
क्योंकि देवरानी के साथ सास-ससुर रहते थे। वो अपनी कमाई बहू पर खर्च करते थे। देवरानी गर्भवती हो गई थी। इस कारण जेठानी को लगने लगा था कि बच्चा होने के बाद घर में उसका कद और बढ़ जाएगा। इससे वो देवरानी से ईर्ष्या रखती थी।
यह था मामला
मोहनपुरा निवासी किशनपाल के बड़े बेटे निशांत की शादी शालिनी से हुई थी। छोटे बेटे प्रशांत की शादी दुर्गेश से हुई थी। 25 अप्रैल को किशनपाल, उनकी पत्नी उमा, बेटे प्रशांत और निशांत काम से गए। शालिनी और दुर्गेश घर में थीं। जिठानी शालिनी देवरानी दुर्गेश के कमरे में आ गई।
पहले उसके पेट में चाकू से वार किए, फिर गर्दन पर वार किया। दुर्गेश की मौत हो गई। शालिनी ने खुद को भी चाकू मारकर घायल कर लिया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। 15 दिन पहले हालात में सुधार होने पर जेल भेज दिया गया।