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शहीद को अंतिम विदा देने शहर उमड़ा

Sat, 17 Oct 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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 पाकिस्तानी आतंकवादियों से मोर्चा लेने के दौरान शहीद हुए लांस नायक गोविंद सिंह मेहता को शुक्रवार को अंतिम विदाई देने सैनिक नगर में मानो पूरा शहर उमड़ पड़ा। सुबह 9.45 बजे तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो इंतजार कर रहे घरवालों के रुदन से हर आंख नम हो गई। शोक में राजपुर चुंगी का बाजार बंद रहा। ताजगंज शमशान घाट पर सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई।
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बता दें, जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में एलओसी पर बुधवार को आतंकवादियों के दल से मुठभेड़ के दौरान  गोविंद शहीद हो गए थे। बुधवार देर रात आगरा लाया गया उनका पार्थिव शरीर मिलिट्र्ी अस्पताल में रखा गया। सुबह छह बजे से ही उनके भोजराज नगर स्थित घर पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। राजपुर चुंगी, उखर्रा, सैनिकनगर, दुर्गानगर, डिफेंस स्टेट, राजनगर, देवरी रोड, शक्तिनगर के हजारों लोग जुटे। सुबह 9.45 बजे सेना के जवान तिरंगे में लिपटे गोविंद का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे तो इलाका गोविंद सिंह अमर रहें के नारे से गूंज उठा। अंतिम दर्शन के बाद गोविंद की मां कमला देवी, पत्नी रेखा और बेटी तनीषा के करुण कंद्रन से हर आंख नम हो गई।
एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह, एडीएम प्रोटोकॉल अरुण कुमार, सीओ सदर असीम चौधरी ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। फिर अंतिम दर्शन करने वालों की कतार लग गई। शवयात्रा राजपुर चुंगी से गुजरी तो बाजार बंद कर दिया गया। लोगों ने रास्ते के दोनों ओर खड़े होकर शहीद को अंतिम विदा दी। ताजगंज शमशान घाट पर सैन्य अफसरों ने सलामी दी। बैंड ने मातमी धुन बजाई और सैनिकों ने शस्त्र उल्टा कर सलामी दी। एडीएम सिटी राजेश श्रीवास्तव, एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह, सपा जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव, शहर अध्यक्ष रईसुद्दीन समेत अन्य दलों के नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी। मुखाग्नि पिता प्रताप सिंह ने दी। इस दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंजते रहे।
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‘वादा तो निभाया पर क्यों
तिरंगे में लिपटकर आया’
गोविंद सिंह ने छुट्टी की अर्जी देने के बाद पत्नी रेखा को फोन पर बताया था कि वह 16 अक्तूबर तक घर  आएंगे। वह 16 की सुबह ही घर लौटे मगर तिरंगे में लिपटकर। अंतिम दर्शन करती रेखा बार-बार यही कहते हुए विलाप कर रही थीं कि तुमने आने का वादा तो निभाया पर ऐसे तो नहीं आना था।

मांग उठी, स्मारक बने
सैनिक नगर के लोगों की मांग है कि शहीद गोविंद सिंह का स्मारक बनना चाहिए। उन्होंने अदम्य साहस से आतंकवादियों से लोहा लिया। पर्वतीय समाज के लोग इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगे।
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