ताजगंज के गांव बुढ़ाना में शनिवार सुबह सीआरपीएफ के रिटायर्ड सिपाही राकेश चंद्र (54) ने घर में लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली की आवाज सुनकर परिवारीजन आ गए। राकेश चंद्र को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। राकेश के बेटे का कहना है कि बैंक से नोट नहीं मिल पाने की वजह से वह तनाव में थे। इंस्पेक्टर थाना ताजगंज ने बताया कि मानसिक तनाव में होने की वजह से आत्मघाती कदम उठाया। इसका कारण पता किया जा रहा है।
बुढ़ाना निवासी राकेश चंद्र पुत्र हरीबाबू सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल थे। 2012 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। शनिवार सुबह पत्नी कुसुम, बेटी तनु और कीर्ति घर की पहली मंजिल पर कमरे में थीं। बड़ा बेटा सुशील नौकरी पर गया था। छोटा बेटा भुवनचंद्र घर के बाहर था। सुबह तकरीबन 8:30 बजे राकेश अपने कमरे में चले गए। कमरे से अचानक गोली चलने की आवाज आई। इस पर परिवारजन कमरे में दौड़ पड़े। राकेश खून से लथपथ थे। बेटे सुशील ने बताया कि पिता ने अपनी लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मार ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। घटना से परिवार में कोहराम मच गया।
बेटे सुशील ने बताया कि पिता ने सेवानिवृत्ति लेने के बाद गांव में दो बीघा जमीन खरीदी थी। मगर, दो साल बाद ही जमीन की कीमत आधी रह गई। घाटा होने से राकेश तनाव में आ गए। इस पर उनका इलाज चल रहा था। नोटबंदी के बाद से घर में आर्थिक संकट खड़ा हो गया। पिता का इलाज भी नहीं हो पा रहा था। सुशील का कहना है कि पिता का खाता पीएसी स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में है। पिछले दिनों उनका एटीएम कार्ड ब्लाक हो गया था। पिता नोट निकालने के लिए कई बार बैंक गए लेकिन रुपये नहीं मिले। सुशील ने बैंककर्मियों को बताया कि उसके पिता बीमार हैं। वह सीआरपीएफ से रिटायर्ड हैं। उन्हें इलाज की जरूरत है। इसके बावजूद बैंककर्मियों ने रुपये नहीं दिए। कई दिन बैंक की लाइन में लगने के बाद भी रुपयों का इंतजाम नहीं हो सका। इससे पिता का तनाव बढ़ गया। इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली।
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1990 में आतंकी मुठभेड़ में लगी थीं पांच गोेली
राकेश चंद्र की सीआरपीएफ में सबसे पहली पोस्टिंग त्रिपुरा में हुई। इसके बाद श्रीनगर, दिल्ली, गांधी नगर, कलकत्ता सहित कई जगह पर रहे। 1990 में बारामूला में तैनात थे। तब आतंकियों से मुठभेड़ हो गई थी। राकेश ने आतंकियों का मुकाबला किया था। हमले में उनको पांच गोलियां लगी थीं। इसके बाद उनका इलाज चला। इसके बावजूद उन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी। साहस के लिए उन्हें पदक भी दिए गए।
परिवार में मचा रहा कोहराम
राकेश की बड़ी बेटी तनु बीए की छात्रा है, जबकि छोटी बेटी कीर्ति कक्षा सात में पढ़ती हैं। सुशील की शादी हो चुकी है। वह बीएसएफ में था। मगर, एक साल पहले नौकरी छोड़ आया था। छोटा बेटा भुवन सिक्योरिटी का काम करता है। राकेश की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
नेताओं ने पूर्व फौजी के परिजनों को दी सांत्वना
बुढ़ाना गांव में पूर्व फौजी राकेशचंद्र की मौत पर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने परिवारीजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने केंद्र सरकार से पूर्व फौैजी के परिवार को 10 लाख रुपये के मुआवजा की मांग की है। कहना है कि अब तक बैंकों की लाइनों में एक सौ से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। प्रतिनिधिमंडल में सुरेश रावत, अशोक लवानिया, संजय यादव, सौरभ दुबे शामिल थे। सपा नेता राजपाल यादव, श्याम भोजवानी ने भी पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।