दो गैंग हैं। एक काले रंग की बाइक पर। दूसरा सफेद रंग की। दोनों में दो - दो बदमाश हैं, यानी कुल मिलाकर चार। और इन्हें पकड़ने के लिए लगी है शहर के 17 थानों की पुलिस। क्राइम ब्रांच भी साथ में है। लेकिन नतीजा शून्य है। बाइकर्स गैंग की चुनौती राई से बढ़कर पहाड़ हो गई है। पुलिस ने पर्स और चेन लूट की वारदात को हलके में लिया। अब यही गिरोह कैश भी लूटने लगे और गोली भी मारने लगे। पूरे शहर में इन बदमाशों का खौफ हो गया है।
--। निशाने पर हैं तीन कालोनियां - यों तो बाइकर्स गैंग पूरे शहर में वारदात कर रहे हैं लेकिन मुख्य निशाने पर तीन कालोनियां हैं। कमला नगर, आवास विकास और जयपुर हाउस। कारण, तीनों में कई रास्ते हैं। बदमाशों को भागने में आसानी होती है। इन कालोनियों में 10-10 से ज्यादा वारदात हो चुकी हैं पिछले तीन महीने में।
--। विरोध होते ही चलाते हैं गोली - बाइकर्स गैंग चेन और पर्स लूट मुख्य रूप से करते हैं। अगर महिला चेन या पर्स न छोड़े तो धक्का दे देते हैं। कई महिलाओं को घायल कर चुके। कुछ समय से कैश लूट शुरू की है। विरोध होने पर गोली चला देते हैं। जैसे सोमवार की रात कमला नगर में सराफ दुमुल जिंदल को सात गोलियां मारीं।
--। जुगाड़ से बढ़ाई बाइक की रफ्तार - शाहगंज में बाइकर्स गैंग का बदमाश गिरफ्तार होने पर यह खुलासा हो चुका है । बाइकर्स गैंग के बदमाशों ने बाइकों में इंजन बदलकर स्पीड बढ़ा ली है। पुलिस की चीता मोबाइल से तेज दौड़ते हैं। इसलिए इनका आसानी से हाथ आना मुश्किल है।
--। सिर्फ दो चेन बरामद हो पाई - बाइकर्स गैंग ने पिछले तीन महीनों में कम से कम 60 चेन लूट की हैं। इनमें से पुलिस सिर्फ दो ही बरामद कर पाई है । दोनों रिकवरी हरीपर्वत क्षेत्र में हुई। इनमें से एक की तो रिपोर्ट भी तब दर्ज हुई जब बदमाश पकड़ लिए गए।
डीजीपी के निर्देश का भी असर नहीं
आगरा। डीजीपी जावीद अहमद करीब तीन महीने पहले आगरा में जब अपराध समीक्षा मीटिंग में आए थे, तब उनके सामने तीन मामले प्रमुखता से आए। पहला ग्रोवर दंपति हत्याकांड का खुलासा न होना। दूसरा, पांच जनवरी से अपहृत चल रहे छात्र बिट्टू का न मिल पाना। और तीसरा बाइकर्स गैंग की गिरफ्तारी न होना। डीजीपी ने तीनों पर काम करने के लिए कहा। बाइकर्स गैंग पर क्लास ली। लेकिन अभी तक इसका कोई असर नजर नहीं आया।