मथुरा के सराफ मर्डर केस के खुलासे में भले ही पुलिस रंगा और उसके गैंग की गिरफ्तारी बड़ी प्लानिंग के साथ करने की बात कर रही है जबकि हकीकत ये है कि रंगा के सताए लोगों ने पुलिस से हाथ मिला लिया था। उसकी पल-पल की जानकारी पुलिस को दी गई थी।
चौबियापाड़ा में राकेश उर्फ रंगा की दहशत थी लेकिन तमाम लोग ऐसे थे जो मौके की तलाश में थे। सराफा हत्या-लूटकांड का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद पुलिस के पास रंगा के बारे में सूचनाएं पहुंचने लगी थीं।
पुलिस को अब चौबियापाड़े कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए था जो रंगा और उसके साथियों की लोकेशन उन्हें दे सके। रंगा के सताए लोगों ने ये सूचनाएं दीं। कभी कंट्रोल रूम पर फोन पहुंचता था तो कभी पुलिस अधिकारियों के पास। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
चौबियापाड़ा में मुठभेड़ से पहले बदमाशों की लोकेशन के लिए ड्रोन कैमरे का भी इस्तेमाल किया गया। संबंधित मकान के ऊपर भी कैमरा उड़ाया गया। कैमरे में भी कुछ चित्र आ गए थे। इससे पूरी लोकेशन भी ट्रेस हो गई थी।